देशहित में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘योगदान’ को नापने का ‘पैमाना’ क्या है?
Aaj Samaaj
|July 04, 2025
इस बार दिल्ली प्रवास के दौरान एक मित्र ने पूछा कि देश हित में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'योगदान' को नापने का पैमाना क्या है? अपनी समझ अनुसार उत्तर देने का प्रयास किया ।
मित्र ने और भी कई बातें कीं, सुझाव भी दिए । लेकिन, जब मैंने पूछा कि आप संघ के साथ जुड़कर काम क्यों न करते तो भाईसाहब इधर-उधर देखने लगे और कन्नी काटने लगे ! उस मित्र से भेंट के बाद मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर बहुत सरल शब्दों में और सरल उदाहरणों के साथ देना बहुत जरूरी है। यही प्रयास इस आलेख में किया जा रहा है । मित्र की बातों से लगा कि वह जानकारी के आभाव में बहुत पहले से ही संघ को कुचलने के प्रयास करने वाले राजनीतिक दल/ दलों के प्रोपेगैंडा से प्रभावित है । जहाँ तक राजनीतिक दलों की बात है तो वे अपनी 'रोटियाँ' सेकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और संघ उनके लिए हमेशा से 'सॉफ्ट टारगेट' रहा है। लेकिन दिल्ली जैसी जगह में रहने वाले उच्च शिक्षा प्राप्त लोग जो देश, धर्म, संस्कृति के बारे में बात करते हैं या जिनका चिन्तन और जीवन इनके अगल बगल घूमता है, उनका संघ के प्रति ऐसा जानकारी का आभाव आश्चर्यजनक है। इसके बाद मन में सहज ही एक प्रश्न उठ खड़ा हुआ कि क्या उन्हें 'व्यक्ति निर्माण' से 'देश निर्माण' का अर्थ पता नहीं होगा ? क्या उन्हें देश के विकास में या हित में व्यक्ति निर्माण के माध्यम से संघ के 'योगदान' के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी ? वास्तव में, संघ के स्वयंसेवक इस 'योगदान' शब्द को नकार देते हैं, उनके लिए यह 'दायित्व' या 'कर्त्तव्य' या 'धर्म' होता है। कदाचित संघ की परिधि से बाहर रहने वाले लोगों का तराजू एक पक्ष की झुका हुआ होता है। वैसे यहाँ यह लिखना आवश्यक है कि संघ आलोचना से परे नहीं है, लेकिन जानकारी के आभाव में या ज्यादा अपेक्षा के कारण संघ की आलोचना कम और बुराई ज्यादा होती है। राजनीतिक दल तो अपने-अपने योगदान को रोज रटते रहते हैं, लेकिन पिछले लगभग 100 वर्ष से संघ के स्वयंसेवक हर परिस्थिति में अपने पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज, देश और धर्म की सेवा में निस्वार्थ भाव से लगे हुए हैं, क्या इस बात को नकारा जा सकता है ? आखिर 'संघ' है क्या ? ध्यान से देखेंगे या विचार करेंगे तो पायेंगे कि संघ उन लोगों का एक संगठन है जिसमें किसान भी है और वैज्ञानिक भी, जिसमें सब्जी बेचने वाला भी है और डॉक्टर भी, जिसमें रिक्शा चलाने वाला भी और हवाई जहाज चलाने वाला भी, जिसमें विद्यार्थी भी है और पढ़ाने वाला शिक्षक भी, जिसमें मोची का काम करने वाला भी है और कम्पनी का मालिक
Denne historien er fra July 04, 2025-utgaven av Aaj Samaaj.
Abonner på Magzter GOLD for å få tilgang til tusenvis av kuraterte premiumhistorier og over 9000 magasiner og aviser.
Allerede abonnent? Logg på
FLERE HISTORIER FRA Aaj Samaaj
Aaj Samaaj
यूपी के संभल में 2 मस्जिदें और एक मदरसा तोड़ा
संभल में रविवार को 2 अवैध मस्जिद और एक मदरसे को ढहा दिया गया है।
1 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
बजट 2026 से पहले देश के चावल निर्यातकों ने वित्त मंत्री से की अपील
कहा, किसानों की आय व वैश्विक हिस्सेदारी बचाने के लिए पैकेज जरूरी
1 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
अमृतसर में शादी समारोह में आप सरपंच की हत्या
पंजाब के अमृतसर में आम आदमी पार्टी के सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
1 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी, समाज और सरकार के बीच सेतु : कृष्णपाल
केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने सांसद निधि से 11 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा
2 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
समाज उत्थान न्यास गुरुग्राम ने मनाई प्रथम शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले की 195वीं जयंती
गुरुग्राम।
1 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिली, अब तक 15 बार में 400 दिन से ज्यादा पैरोल पर
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, जो अपनी दो शिष्याओं के साथ रेप के मामले में 20 साल की जेल की सजा काट रहा है, रविवार को 40 दिन की पैरोल मिलने के बाद हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आया।
2 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
रिटर्निंग अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड किए जाएं सार्वजनिक : उद्धव ठाकरे
मुंबई।
2 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
सोमनाथ : अटूट आस्था के 1000 वर्ष
सोमनाथ ... ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है।
6 mins
January 05, 2026
Aaj Samaaj
कर्नाटक के हुबली में नाबालिग से एक सप्ताह तक दुष्कर्म
बेंगलुरु।
1 min
January 05, 2026
Aaj Samaaj
दिव्यांगों के लिए वित्तीय सहायता, हॉस्टल और सहायक उपकरण उपलब्ध करा रही सरकार : रविन्द्र इंद्राज
नई दिल्ली।
1 mins
January 05, 2026
Listen
Translate
Change font size
