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सऊदी-पाक समझौते पर चाहिए संयमित रुख

India Today Hindi

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October 08, 2025

भारत के लिए सऊदी अरब एक अहम ऊर्जा साझेदार के अलावा एक बड़े प्रवासी समुदाय का मेजबान भी. हमारी प्रतिक्रिया संबंधों को बनाए रखने वाली हो

- सैयद अकबरुद्दीन

सऊदी-पाक समझौते पर चाहिए संयमित रुख

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच 17 सितंबर को रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होते ही दो महासागरों और एक उपमहाद्वीप में कई तरह की अटकलें हिलोर मारने लगीं. इसकी वजह बनी समझौते की एक लाइन— एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. इसने खाड़ी से लेकर हिमालय तक सामरिक रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने पर बहस छेड़ दी. भारत के लिए जरूरी है कि इससे कतराने या फिर बेचैनी भरी प्रतिक्रिया देने के बजाए पूरी स्पष्टता के साथ आगे अपनाए जाने वाले रुख पर गौर करे.

यह अभी क्यों ? दोहा से ही शुरू करते हैं. 9 सितंबर को इज्ज्राएली जेट विमानों ने कतर की राजधानी में एक सेफ हाउस पर हमला किया, जहां हमास नेता एक युद्धविराम प्रस्ताव पर माथापच्ची करने में जुटे थे. धमाके की आवाज ने खाड़ी की राजधानियों को हिलाकर रख दिया. इज्ज्राएल की इस साल सात मोर्चों पर कार्रवाई को देखते हुए इसमें कुछ अस्वाभाविक भी न था. उसने गाजा, लेबनान, सीरिया, ईरान, यमन, ट्यूनीशिया के बाद अब कतर को निशाना बनाया था. स्थितियों पर वाशिंगटन का कोई नियंत्रण न देख क्षेत्रीय भरोसा डगमगाने लगा. अटकलों को हवा मिली कि अगला निशाना कौन.

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