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सात तोपों की सलामी के हकदार थे टिहरी नरेश
DASTAKTIMES
|December 2023
भारत वर्ष के दीर्घजीवी राजवंशों में से एक, पंवार वंश की रियासत टिहरी कभी हिमालयी रियासतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण रियासत मानी जाती थी, इसलिए टिहरी नरेश को महाराजा का दर्जा हासिल था।
टिहरी नरेश का प्रोटोकॉल 7 तोपों की सलामी का था। इसीलिए सभी हिमालयी रियासतों में इसका दबदबा भी था। इसी दबदबे के कारण हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े नेता डॉ. यशवंत परमार ने टिहरी को हिमाचल की शुरुआती 28 रियासतों से दूर ही रखा, जबकि भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से टिहरी संयुक्त प्रान्त की बजाय हिमाचल की रियासतों के करीब होने के साथ ही इन रियासतों से रोटी बेटी के संबंध भी थे और टिहरी नरेश कभी-कभी अपने छोटे आकार के पड़ोसियों की आर्थिक मदद भी करते थे। इस टिहरी रियासत के भारत संघ या संयुक्त प्रान्त ( अब उत्तर प्रदेश) में विलय की प्रक्रिया भी इतिहास के पन्नों में गुम हो गयी, जिस कारण इस मुद्दे को लेकर कुछ भ्रांतियां भी रही हैं। हमारे उत्तराखण्ड की नयी पीढ़ी को विलय की उस ऐतिहासिक प्रक्रिया और राजपाठ छिन जाने के बाद भी राज परिवार की शाही स्थिति से अवगत कराने के लिए यह संक्षिप्त आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है। ऐतिहासिक प्रमाणों सहित विस्तृत जानकारी के लिये मेरी पुस्तक 'टिहरी राज्य के ऐतिहासिक जन विद्रोह' देखी जा सकती है।
Denne historien er fra December 2023-utgaven av DASTAKTIMES.
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