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गुणोत्सव: सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की संजीवनी बूटी

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May 2023

सरकारी स्कूलों के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो है? इस श्रेय के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, तत्कालीन शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य से लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा तथा शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू व मुख्य सचिव से लेकर स्कूल के चपरासी तक जाता है।

- संजीव कलिता

गुणोत्सव: सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की संजीवनी बूटी

सन 2017 से हर साल असम के सरकारी स्कूलों में आयोजन किए जा रहे गुणोत्सव के सकारात्मक नतीजे अब सामने आने लगे हैं। निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के गिरते प्रदर्शन को सुधारने के लिए सोनोवाल सरकार के शासन के दौरान शुरू गुणोत्सव का आयोजन मानो संजीवनी बूटी की काम कर गई है । विगत 15 जनवरी से 18 फरवरी तक आयोजित गुणोत्सव2023 के परिणाम सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर नई उम्मीदें जगा जाती हैं । गुजरात की तर्ज पर लागू किए गुणोत्सव से असम के सरकारी शिक्षा व्यवस्था में जहां काफी बेहतरी देखी जा रही है, वहीं सरकारी स्कूलों की ओर बच्चे और अभिभावक फिर से रुख करने लगे हैं। सरकारी स्कूलों के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है? इस श्रेय के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, तत्कालीन शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य से लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा तथा शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू व मुख्य सचिव से लेकर स्कूल के चपरासी तक जाता है। शिक्षकों की भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका रही है। आईए, इस बात की सच्चाई को समझने के लिए जरा आंकड़ों पर नजर डालते हैं।

गुणोत्सव - 2023 में शिवसागर जिले ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि चराईदेउ और गोलाघाट जिले क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। सनद रहे कि 2022 के गुणोत्सव में भी शिवसागर प्रथम, माजुली दूसरा और नलबाड़ी तीसरे स्थान पर था । गुणोत्सव-2023 के परिणामों के अनुसार इस बार 11,886 (28.64 फीसदी) स्कूलों को 'ए प्लस', 19172 (46.19 फीसदी) स्कूलों को 'ए', 7710 (18.58 फीसदी) स्कूलों को 'बी', 1972 (4.75 फीसदी) स्कूलों को 'सी' और केवल 767 (1.85 फीसदी) स्कूलों को 'डी' ग्रैड मिले हैं। इस बार राज्य के कुल 44531 विद्यालयों में गुणोत्सव का आयोजन हुआ था जिसके तहत कुल 41, 35, 163 विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया गया । कुल 18097 एक्सटर्नल इवालुएटरों ने इन स्कूलों का दौरा किया था।

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