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चर्चा में ही सिमट कर रह गई राहुल की भारत जोड़ो यात्रा
DASTAKTIMES
|January 2023
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जो लोग यह कहते घूम रहे थे कि राहुल गांधी ने इस यात्रा से काफी कुछ सीखा है, वह परिपक्व नेता नजर आने लगे हैं, उनकी भी कलई तब खुल गई, जब राहुल गांधी ने दिल्ली की जनसभा में अपनी यात्रा से जुड़ा वृतांत सुनाया, जिसमें आम जनता से जुड़े मुद्दों की बजाए गाय और कुत्ते-बिल्लियों की चर्चा ज्यादा हुई।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान अभी तक करीब तीन हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हैं। यह यात्रा अभी जारी है। इस यात्रा में अहम पड़ाव तक आया जब यात्रा ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रवेश किया। अमूमन कोई भी नेता, पार्टी या संगठन अपनी यात्रा या आंदोलन को दिल्ली पहुंचने पर एक जनसभा करके उसे पूर्ण विराम दे देता है। दिल्ली की जनसभा में यात्रा या आंदोलन के मकसद और इससे हुए फायदे का पूरा 'निचोड़' सामने आ जाता है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जब दिल्ली पहुंची तो उन्होंने भी यहां जनसभा करके अपनी बात रखी। यात्रा कैसी रही, इसके बारे में भी बताने की कोशिश की, परंतु सोच की कमी के कारण राहुल गांधी अपनी बात या अनुभव को न तो जनता के सामने रख पाए न ही उन विरोधियों को आईना दिखा पाए जो आरोप लगा रहे थे कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा उनकी रीलांचिग के अलावा कुछ नहीं है। यह सच भी है कि दिल्ली में राहुल गांधी ने अपने संबोधन में ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे लोग यह समझ सकें कि उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा से काफी कुछ सीखा है, जबकि हजारों किलोमीटर की यात्रा में वह लाखों लोगों से मिले, उनसे बात की। राहुल के लिए यह अनुभव काफी मायने रखता होगा, मगर हमेशा की तरह इस बार भी राहुल गांधी रटे-रटाये जुमले ही बोलते रहे। हमेशा की तरह वह इस मौक पर भी अंबानी-अडानी से बाहर ही नहीं निकल पाए, जिस कारण राहुल की भारत जोड़ो यात्रा की सार्थकता पर ही सवाल खड़ा हो गया है। इतनी लम्बी यात्रा के बाद भी राहुल बाबा ने देश को नहीं समझा तो यह उनकी परिपक्तता पर बड़ा प्रश्न चिह्न है।

Denne historien er fra January 2023-utgaven av DASTAKTIMES.
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