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छत्रपति शिवाजी के अपमान पर सियासत
DASTAKTIMES
|December - 2022
‘छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान' विषय को लेकर राज्य में नाराज दलों के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। उनको हटाने की मांग जोर पकड़ ली। लातूर में जबरदस्त बंद का ऐलान किया गया। बीड में राज्यपाल के खिलाफ सड़क मोर्चा निकाला गया। राज्यपाल कोश्यारी चले जाओ, कोश्यारी को हटाओ, दिल्ली भेजो, ऐसी जोरदार घोषणाओं के साथ शिवप्रेमी जनता ने अपनी नाराजगी व्यक्त की।
राज्यपाल कोश्यारी के बयान पर बवाल
देश की पश्चिमी छोर पर स्थित महाराष्ट्र राज्य की भूमि कई मामलों में महत्वपूर्ण है। राम काल से लेकर आजादी की लड़ाई तक यह भूमि चर्चा में रही है। चाहे मामा मारीच की बात हो या सीता माता की तलाश में नाशिक में रुके भगवान राम की बात हो या फिर मुगलों को परास्त करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता ख्याति या मराठा साम्राज्य का विस्तार हो, ऐसे कई विषयों में महाराष्ट्र की मिट्टी अपनी अलग छाप छोड़ती है। भक्ति के सागर से लेकर शक्ति का गागर बहाने वाली महाराष्ट्र की भूमि किसी परिचय की मोहताज नहीं है। कई मामलों ने विश्व प्रसिद्ध महाराष्ट्र पिछले महीने से खासी चर्चा में है। यहां की राजनीति इस कदर मोड़ ले चुकी है कि वह आम जनता की समस्या से परे होकर आदर्शों के भवर में फंस गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज नए आदर्श हैं या पुराने, इस विवाद में सत्ताधारी भाजपा और शिंदे गुट से विपक्ष आपस में भिड़ रहे हैं और इसकी शुरुआत की है राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने एक भाषण में कोश्यारी ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और केंद्रीय मंत्री को नए जमाने का आदर्श बताया और शिवाजी महाराज को कहा कि अब ये पुराने जमाने के आदर्श हो चुके हैं। उनके इस बयान ने मानो महाराष्ट्र से उद्योग, बेरोजगारी, बाढ़ आपदा जैसी दर्जनों प्रथमिक समस्या को बगल कर दिया और सबसे महत्वपूर्ण हो गया 'शिवाजी पुराने आदर्श क्यों' का मुद्दा। इसे उनका अपमान बताते हुए विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के आराध्य दैवत छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करने का बीड़ा भाजपा ने उठाया है। आयेदिन भाजपा नेता शिवाजी महाराज पर नए-नए बयान देकर विवादों को जन्म दे रहे हैं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, भाजपा प्रवक्ता व सांसद सुधांशू त्रिवेदी, महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के बाद अब भाजपा के एक और नेता प्रसाद लाड ने भी शिवाजी महाराज के जन्म स्थान को लेकर विवादित बयान दिया। विपक्ष के अनुसार लोक प्रतिनिधियों को शिवाजी महाराज का इतिहास मालूम नहीं है। यह महाराष्ट्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए शर्म की बात है।
Denne historien er fra December - 2022-utgaven av DASTAKTIMES.
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