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एक अवसर है दुःख
Aha Zindagi
|February 2025
प्रकृति में कुछ भी अनुपयोगी नहीं है, फिर दु:ख कैसे हो सकता है जिसे महसूस करने के लिए शरीर में एक सुघड़ तंत्र है! अत: दु:ख से भागने के बजाय अगर इसके प्रति जागरूक रहा जाए तो भीतर कुछ अद्भुत भी घट सकता है!
हम अपना पूरा जीवन दुःख से बचने और सुख की तलाश करने में बिताते हैं.लेकिन कभी इस प्रयास में सफल नहीं होते। क्योंकि, दुःख और सुख के स्वभाव से हम परिचित नहीं हैं। हक़ीक़त यह है कि जितना अधिक कोई दुःख से बचने की कोशिश करता है उतना ही उसे दुःख मिलता है, क्योंकि दुःख सुख के विपरीत नहीं है, दुःख सुख का ही एक रूप है।
दुःख में बदल जाता है सुख
Denne historien er fra February 2025-utgaven av Aha Zindagi.
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