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अपनी गलती को मानने से सम्मान बढ़ता ही है..

Yoga and Total Health

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October 2025

हंसा मां हमेशा कहती हैं गलती करना स्वाभाविक है, यह अनुचित तो तब हो जाती है जब व्यक्ति गलती से सबक नहीं सीख सके, उस गलती को दोहराता रहे व दुःखी, परेशान होता रहे।

- संकलन - संगीता जैन

अपनी गलती को मानने से सम्मान बढ़ता ही है..

जैन संप्रदाय में इसका बहुत अच्छा त्यौहार मनाया जाता है- क्षमापनापर्व जिसमें वर्ष में एक दिन क्षमा मांगने का आता है, जब अपने मिलने वाले लोगों से, जिनसे कुछ मनमुटाव हो उनसे, यहाँ तक कि हर जीव से क्षमा याचना की जाती है, अपनी हर गलती या अपराध के लिये क्षमा मांगी जाती है साथ ही क्षमा प्रदान भी की जाती है।

जब एक बार क्षमा मांग ली जाती है, तो मन भी बहुत हल्का हो जाता है, दो लोगों के बीच जो मनमुटाव चल पड़ा था वह भी शांत हो जाता है। जीवन में यदि आप पर बिना किये अपराध का किसी ने बड़ा इल्जाम लगा भी दिया उस पर भी आप क्षमा मांग लें तो इल्जाम लगाने वाला ही अपराध बोध को ढोएगा। क्षमा मांगना न तो जलील होना है, न ही हार जाना। यह तो मन के परिपक्व होने की निशानी है।

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