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ओशो की वाणी में सारे सुर समाहित हैं
Sadhana Path
|December 2025
किसी की नजर में ओशो, प्रोफेसर हैं तो किसी की नजर में प्रवचनकर्ता, पर मेरी नजर में ओशो प्रोफेसर रजनीश नहीं 'आचार्य रजनीश' हैं। आज भी जब उन्हें सुनती हूं, पढ़ती हूं, वो मुझे आचार्य के रूप में ही मिलते हैं। इतना ही नहीं ओशो को केवल मात्र प्रवचनकर्ता कहना भी उनका अपमान होगा। क्योंकि जो हमारी अपनी अंतरआत्मा की चौकटें खोलता हो और हमें उससे साक्षात्कार करवाने की कोशिश करता हो, वो कोई आम इंसान नहीं हो सकता, वो प्रोफेसर या प्रवचनकर्ता से बहुत ऊपर की बात है।
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उनकी रजनीश से ओशो तक की जो यात्रा है मेरे लिए वहां पहुंचना मुश्किल है। ओशो एक बहुत बड़ा विषय है, उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है। उनके रूप को किसी श्रेणी में चिपकाया नहीं जा सकता। जिनके अंदर ब्रह्म भी है जो अपने पूरे प्रभावनावृत्ति के साथ कहीं मौजूद हैं। जिससे हम कभी मिल नहीं सकते उसको देख पाने की दृष्टि करोड़ों में किसी एक के पास होती है।
Denne historien er fra December 2025-utgaven av Sadhana Path.
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