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मुझे कभी मृत मृत समझना मैं सदा वर्तमान हूं
Sadhana Path
|December 2024
ओशो ने मृत्यु को उसी सहजता और हर्ष से वरण किया था जिस प्रकार से एक आम व्यक्ति जीवन को करता है। उन्होंने जगत को यही संदेश दिया कि मृत्यु के प्रति सदा जागरूक रहो, उसे वरण करो। आज ओशो भले ही अपना शरीर छोड़ चुके हों लेकिन अपने विचारों के माध्यम से वो आज विश्व में कहीं ज्यादा विस्तृत, विशाल रूप से मौजूद हैं।
'एक खतरनाक तूफान में कोई नाव उलट गई। एक व्यक्ति उस नाव में बच गया और एक निर्जन द्वीप पर जा पहुंचा। दिन, दो दिन, चार दिन, सप्ताह, दो सप्ताह उसने प्रतीक्षा की कि जिस बड़ी दुनिया का वह निवासी था वहां से कोई उसे बचाने आ जाए। फिर महीने बीत गए और वर्ष भी बीतने लगा। किसी को आते ना देख वह धीरे-धीरे प्रतीक्षा करना भी भूल ही गया। तकरीबन पांच वर्ष बाद कोई जहाज वहां से गुजरा। उस एकांत निर्जन द्वीप पर उस आदमी को निकालने के लिए जहाज ने लोगों को उतारा। और जब लोगों ने उस खो गए आदमी को वापस चलने को कहा, तो वह विचार में पड़ गया। उन लोगों ने कहा 'क्या विचार कर रहे हैं, चलना है या नहीं?' तो उस आदमी ने कहा 'अगर तुम्हारे साथ जहाज पर कुछ अखबार हो जो तुम्हारी दुनिया की खबर लाए हों तो मैं पिछले दिनों के कुछ अखबार देख लेना चाहता हूं।' अखबार देखकर उसने कहा 'तुम अपनी दुनिया संभालो और अपने अखबार भी और मैं जाने से इनकार करता हूं।'
रहस्यदशी ओशो द्वारा सुनाई गई उपरोक्त कहानी कितनी ही पुरानी या काल्पनिक ही क्यों न हो, यह कहानी आज भी उतनी ही सार्थक है जितनी कभी पहले, बल्कि पहले से कहीं अधिक सार्थक। जिस प्रकार आज चारों तरफ त्राहिमामत्राहिमाम मचा हुआ है, अपराध और आत्महत्याओं में तीव्रता से इजाफा हो रहा है, भूतकाल में ऐसा कभी ना था। समस्या पहले से कहीं अधिक गंभीर है, आज चारों ओर हिंसक घटनाएं दिन-ब-दिन इतनी बढ़ती जा रही हैं कि इन पर रोक लगाना लगभग असंभव सा लगने लगा है। मनुष्य एक मृत अंत की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। तीसरे विश्व युद्ध की संभावना हर समय बनी रहती है।
ऐसे में क्या है समाधान ? ओशो कहते हैं। अगर मनुष्य की चेतना में अब भी कोई बुनियादी परिवर्तन नहीं होता तो आने वाला भविष्य मनुष्य के इतिहास में सर्वाधिक विनाशकारी होगा एवं भयावह होगा।
Denne historien er fra December 2024-utgaven av Sadhana Path.
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