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ग्रीष्मकालीन मूंग की उन्नत खेती
Farm and Food
|February 2025
कम समय में तैयार होने वाली मूंग की खेती मुनाफा तो देती है, साथ ही साथ जमीन की पैदावार शक्ति भी बढ़ाती है
दलहनी फसलों में मूंग का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है. इस में 24 फीसदी प्रोटीन के साथसाथ रेशा एवं लौह तत्त्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. आज जल्दी पकने वाली किस्मों एवं उच्च तापमान को सहन करने वाली प्रजातियों की उपलब्धता के कारण यह फायदेमंद सिद्ध हो रही है.
वर्तमान में सघन खेती, अंधाधुंध कीटनाशियों एवं असंतुलित खादों के इस्तेमाल से जमीनों की उर्वराशक्ति घट रही है. साथ ही, सभी फसलों की उत्पादकता में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है.
इस स्थिति से निबटने के लिए हरी खादों व दलहनी फसलों को अपनाएं और अपनी जमीनों की उर्वराशक्ति को बरकरार रखने व देश की बढ़ती हुई खाद्यान्न समस्याओं से निबटने में अपना भरपूर योगदान दें.
ग्रीष्मकालीन मूंग उगाने के फायदे
• अतिरिक्त आय
• कम समय के कारण धान व गेहूं फसल चक्र में उपयोगी
• खाली पड़े खेतों का सही उपयोग
• भूमि की उपजाऊ शक्ति में सुधार
• उगाने में कम खर्च
• पानी का सदुपयोग
• बीमारी व कीटों का कम प्रकोप
• भूमि कटाव से बचाव
• दलहन उत्पादन में वृद्धि
• विदेशी पैसों की बचत
उन्नत किस्में : मूंग की बिजाई के लिए के-851 (70-75 दिन) मुसकान (65 दिन), एसएमएल-668 (60-65 दिन), एमएच-421 (60 दिन) व नई किस्म एमएच-1142 (63-70 दिन) की खेती की जा सकती है जो धान व गेहूं चक्र के लिए बहुपयोगी पाई गई है.
भूमि : अच्छी मूंग की फसल लेने के लिए दोमट या रेतली दोमट भूमि सही रहती है. समय पर बिजाई वाले गेहूं से खाली खेतों में ग्रीष्मकालीन मूंग ली जा सकती है.
इसके अलावा धानगेहूं उगाने वाले क्षेत्रों में आलू, गन्ना व सरसों से खाली खेतों में भी मूंग की खेती की जा सकती है.
भूमि की तैयारी : गेहूं की कटाई के एक सप्ताह पहले रौनी / पलेवा करें और गेहूं की कटाई के तुरंत बाद 2-3 जुताई कर के खेत को अच्छी तरह तैयार करें.
इस बात का खास खयाल रखें कि खेत में बिजाई के समय समुचित नमी हो, ताकि समुचित जमाव हो सके.
Denne historien er fra February 2025-utgaven av Farm and Food.
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