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अंगूर की खेती से अच्छा मुनाफा
Farm and Food
|February Second 2024
हमारे देश में कारोबारी रूप से अंगूर की खेती पिछले तकरीबन 6 दशकों से की जा रही है. माली नजरिए से सब से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बागबानी उद्यम के रूप में अंगूर की खेती अब काफी उन्नति पर है. आज महाराष्ट्र में सब से अधिक क्षेत्र में अंगूर की खेती की जाती है और उत्पादन की दृष्टि से यह देश में अग्रणी है.
भारत में अंगूर की खेती अनूठी है, क्योंकि अंगूर उष्ण व शीतोष्ण सभी प्रकार की जलवायु में पैदा किया जा सकता है. हालांकि अंगूर की अधिकांशतः व्यावसायिक खेती (तकरीबन 85 फीसदी इलाके में) उष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले इलाकों में (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले उत्तरी राज्यों में विशेष रूप से ताजा अंगूर उपलब्ध नहीं होते हैं. अतः उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले इलाके जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली व राजस्थान के कुछ भागों में अंगूर की खेती की जा रही है, जिस से जून महीने में भी अंगूर मिलते हैं.
अंगूर के कई उपयोग हैं. इसे फल के तौर पर खाने के अलावा इन से किशमिश, मुनक्का, जूस, जैम और जैली भी बनाए जाते हैं. साथ ही, इस का उपयोग मदिरा बनाने में भी किया जाता है. अंगूर में कई पोषक, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल तत्त्व पाए जाते हैं, लिहाजा हमारी सेहत के लिए अंगूर का सेवन काफी लाभकारी माना गया है.
भूमि और जलवायु
अंगूर की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली रेतीली, दोमट मिट्टी उपयुक्त पाई गई है. इस में अंगूर की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है, वहीं अधिक चिकनी मिट्टी इस की खेती के लिए ठीक नहीं रहती है. इस की खेती के लिए गरम, शुष्क व दीर्घ ग्रीष्म ऋतु अनुकूल रहती है. अंगूर के पकते समय वर्षा या बादल का होना बहुत ही हानिकारक है. इस से दाने फट जाते हैं और फलों की क्वालिटी पर काफी बुरा असर पड़ता है.
खेती का उचित समय
दिसंबर से जनवरी महीने में फसल की तैयार की गई जड़ की रोपाई की जाती है.
अंगूर की उन्नत किस्में
Denne historien er fra February Second 2024-utgaven av Farm and Food.
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