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सफेद बटन मशरूम की मुख्य-मुख्य जैविक और अजैविक समस्याएँ तथा उनका निदान
Modern Kheti - Hindi
|1st February 2024
सफेद बटन खुम्ब का ज्यादातर उत्पादन शरद ऋतु में किया जाता हैं बल्कि कुछ खुम्ब उत्पादक वातानुकूलित नियंत्रित कक्षों में सारा वर्ष इस मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। यह एक नकदी फसल है और दूसरी नकदी फसलों की तरह इसमें भी कुछ जैविक तथा अजैविक समस्याएँ देखी जाती हैं जिनका मशरूम उत्पादकों को ज्ञान नहीं होता। कई बार मशरूम उत्पादक को सही ज्ञान न होने से आर्थिक हानि की आशंका बनी रहती है।
बागवानी में विविधीकरण के लिए मशरूम एक ऐसा व्यवसाय है जो बहुत कम पूंजी से शुरू किया जा सकता है। इसे भूमिहीन युवक व युवतियाँ भी उनके पास उपलब्ध किसी भी कच्चे या पक्के कमरे से शुरु कर सकते हैं। पूरे विश्व में लगभग 14000 से 15000 मशरूम की प्रजातियाँ पाई जाती हैं और किन्तु सभी खाने योग्य नहीं होती। कुछ मशरूम जहरीली होती हैं और कुछ प्रजातियां केवल दवा बनाने के लिये प्रयोग में लाई जाती हैं। खाने योग्य सभी मशरूम में भी पौष्टिकता के साथ-साथ कई औषधीय गुण भी पाये जाते हैं। इनके नियमित सेवन से मनुष्टय अपने आप को कई रोगों से बचा जा सकता है। किन्तु जागरूकता के अभाव से ग्रामीण आँचल में अभी भी इनका सेवन नहीं किया जाता। भारत में जहां मुख्यतय 4-5 तरह की ही मशरूम पैदा की जाती है वहीं चीन में लगभग 60 तरह की मशरूम का उत्पादन किया जाता है। देश में सफेद बटन मशरूम का उत्पादन ही मुख्य रूप से कई राज्यों में किया जाता है। वर्ष 2022-23 के दौरान देश में दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 3,07,840 मैट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हुआ। मशरूम का उत्पादन देश के सभी प्रदेशों में किया जाता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार के 2022-23 वर्ष के दूसरे अग्रिम अनुमान के आंकड़ों के अनुसार दौरान उड़ीसा में 34110 मैट्रिक टन, महाराष्ट्र में 32900 मैट्रिक टन, बिहार राज्य में 32150 मैट्रिक टन और हरियाणा में 23650 मैट्रिक टन, गुजरात में 23150 मैट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 22980 मैट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हुआ। देश के दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हिमाचल प्रदेश, छतीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, तामिलनाडु, पश्चिम बंगाल इत्यादि में भी 12000 से लेकर 20000 मैट्रिक टन प्रति वर्ष मशरूम पैदा किया गया। हरियाणा प्रांत में सफेद बटन खुम्ब का ज्यादातर उत्पादन शरद ऋतु में किया जाता हैं बल्कि कुछ खुम्ब उत्पादक वातानुकूलित नियंत्रित कक्षों में सारा वर्ष इस मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। यह एक नकदी फसल है और दूसरी नकदी फसलों की तरह इसमें भी कुछ जैविक तथा अजैविक समस्याएँ देखी जाती हैं जिनका मशरूम उत्पादकों को ज्ञान नहीं होता। कई बार मशरूम उत्पादक को सही ज्ञान न होने से आर्थिक हानि की आशंका बनी रहती है। इस लेख में सफेद बटन खुम्ब के मुख्य जैविक एवं अजैविक समस्याओं के कारण, लक्षण तथा इनके समाधान पर विस्तार से बताया गया है।&nb
Denne historien er fra 1st February 2024-utgaven av Modern Kheti - Hindi.
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