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मृदा प्रदूषण चिंता का विषय, नैनोकण का खतरा
Modern Kheti - Hindi
|December 01, 2023
वर्तमान अनुसंधान खाद्य व अनाज वाली फसलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बढ़ता औद्योगीकरण तथा मानवजनित गतिविधियों को करना अत्याधिक मात्रा में विषाक्त धातुएं कृषि योग्य मिट्टी में आ रही है
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कृषि योग्य मिट्टी में भारी धातु (heavy-metals) का बढ़ता संचय विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक तंत्र पर हानिकारक प्रभावों के कारण, हाल के वर्षों में सभी का ध्यान आकर्षित किया है। सामान्यतः मिट्टी में सीसा (Pb), क्रोमियम (Cr), आर्सेनिक (As), जस्ता (Zn), कैडमियम (Cd), तांबा (Cu), पारा (Hg ) और निकल (Ni) जैसी धातु ज्यादा पाई जाती है। मृदा आज इन भारी धातुओं का सिंक (sink) बनती चली जा रही है चाहे वो कल-कारखाने से निकलने वाली व अन्य मानवजनित गतिविधियों या प्राकृतिक रूप से रिसने वाली धातुएं, सब जाकर मिट्टी में ही इकट्ठा हो रही हैं। इसके अलावा गहन - कृषि (Intensive agriculture) क्रियाएं, अत्याधिक रासायनिक खादों, कीटनाशक, खरपतवारनाशक, ग्रोथ प्रमोटर्स इत्यादि का प्रयोग कृषि योग्य भूमि को प्रदूषित कर रहा है। दूसरी ओर बरसात या नम क्षेत्रों में एसिड-आधारित उर्वरकों का उपयोग अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी का पीएच (pH) कम कर देता है जो मृदा में मौजूद भारी धातुओं की मोबिलिटी बढ़ा देता और वो परेनटल रॉक से ऊपर कृषि योग्य मृदा में आ जाते हैं। मृदा में बढ़ता प्रदूषण कई अन्य समस्याओं को भी जन्म दे रहा है जैसे कि पीने योग्य पानी को प्रदूषित करना, प्रदूषक का खाद्य फसलों में इकट्ठा होना, कृषि योग्य जीवाणुओं को प्रभावित करना इत्यादि इत्यादि। नई तरह के प्रदूषण (नैनोकण) का खतरा (पर्यावरण में बढ़ते नैनोकण व भारी धातुएं तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव)

Denne historien er fra December 01, 2023-utgaven av Modern Kheti - Hindi.
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