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खरीफ फसलों में कैसे करें बीजोपचार
Modern Kheti - Hindi
|1st March 2023
सघन फसल पद्धति की वजह से कीट व बीमारियों में बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से किसानों को अधिक आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इन कीट व बीमारियों से उपज के साथ-साथ फसल की गुणवता पर भी कुप्रभाव होता है। इसलिये इनके नियंत्रण हेतु किसानों की फसल लागत दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। बीजोपचार एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा मामूली लागत से किसान बहुत सी बीमारियों से फसल को बचा सकते हैं। खरीफ मौसम की मुख्यतयाः फसलें धान, कपास, ग्वार, बाजरा, मूंग, मोठ, उड़द, लोबिया व तिल इत्यादि हैं। इन फसलों पर कई मिट्टी जनित व बीज जनित बीमारियों से बचाव के लिये हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निम्नलिखित बीजोपचार अनुमोदित किया हुआ है :
बाजरा में बीज उपचार : बीज का भलीभांति निरीक्षण करें और देखें कि उनमें अरगट (चेपा) के पिंड न हों। यदि बीज किसी प्रमाणित संस्था से न लिया गया हो तो अरगट के पिंड हाथ से चुनकर बाहर निकाल दें। यदि किसान अपना ही बीज प्रयोग में ला रहे हैं तो पिण्डों को हाथ से चुनकर निकाल दें या नमक के पानी में बीज को डुबोकर निकाल दें। एक एकड़ के बीज के लिए 1 किलोग्राम नमक को 10 लीटर पानी में मिलायें। इस नमक वाले पानी में 2-3 किलोग्राम बीज बारी-बारी से डालें तथा तैरने वाले बीज बाहर निकाल दें। नीचे बैठे हुए भारी बीजों को निकालकर दोतीन बार साफ पानी से धो लें ताकि इन बीजों पर नमक के अंश न रहें। अन्त में धुले हुए सारे बीज को छाया में सुखा लें। ऐसे बीज को बोने से पहले 2 ग्राम एमीसान तथा 4 ग्राम थाइरम प्रति किलोग्राम बीज से सूखा उपचार करें।
यदि बीज पहले से उपचारित न हो तो डाऊनी मिल्ड्यू (जोगिया या हरी बालों वाला रोग) की शुरुआती रोकथाम के लिए बीज को मैटालेक्सिल 35% से 6 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से भी उपचारित कर देना चाहिए।
Denne historien er fra 1st March 2023-utgaven av Modern Kheti - Hindi.
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