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मैं जिंदा हूँ तो केवल पूज्य बापूजी की वजह से !
Rishi Prasad Hindi
|December 2021
सन् २००१ की बात है। मेरा प्लाइवुड का धंधा अच्छा चल रहा था लेकिन ज्यादा मुनाफे के लालच में मैं 'फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर' का काम करने लगा । उसमें मुझे बहुत घाटा सहना पड़ा और मेरे ऊपर डेढ़-दो करोड़ रुपये का कर्जा हो गया । पैसे समय पर न लौटाने के कारण मेरे ऊपर २२ केस हो गये । कई जगहों पर तो कोर्ट ने अरेस्ट वारंट तक निकाल दिये थे । जेल जाने की नौबत आ गयी थी। आखिर कोई रास्ता न निकलता देख परेशान होकर मैंने आत्महत्या करने का र निर्णय ले लिया।
मैंने मेरे एक साधक रिश्तेदार को अपनी सारी आपबीती सुनायी और कहा : ''मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ। आप मेरे बच्चों का खयाल रखना।'' तो उन्होंने मेरा एकदम से हाथ पकड़ लिया और बोले : ''बिरजू भाई ! पूज्य बापूजी जैसे गुरु पाकर आत्महत्या का विचार करना ! बापूजी इसे महापाप बोलते हैं।'
Denne historien er fra December 2021-utgaven av Rishi Prasad Hindi.
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