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जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन नीचराशिस्थ चन्द्रमा के फल

Jyotish Sagar

|

July 2025

प्रस्तुत श्रृंखला 'जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल' के अन्तर्गत अप्रैल, 2025 अंक से नीचराशिस्थ चन्द्रमा के फलों का विवेचन आरम्भ किया गया है, जिसमें नीचराशिस्थ चन्द्रमा के भावेश के रूप में फलों का वर्णन किया जा रहा है, जिसमें कन्या लग्न तक की जन्मपत्रिकाओं में नीचराशिस्थ चन्द्रमा का सोदाहरण वर्णन किया जा चुका है।

जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन नीचराशिस्थ चन्द्रमा के फल

प्रस्तुत अंक में तुला से धनु लग्न तक के फलों का सोदाहरण वर्णन प्रस्तुत कर रहे हैं।

तुला लग्न में नीच राशिस्थ चन्द्रमा : तुला लग्न में चन्द्रमा दशमेश होकर द्वितीय भाव में अपनी नीच राशि में स्थित होता है। द्वितीय भाव में चन्द्रमा का होना सामान्यतः प्रतिकूल नहीं माना जाता, परन्तु उसका नीच राशिस्थ होना शुभ नहीं है, विशेषतः वाणी और व्यवहार तथा स्वास्थ्य और रिश्तों से सम्बन्धित मामलों में। जातक प्रायः रूखी एवं व्यंग्यपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करने वाला हो सकता है। इसके अतिरिक्त यहाँ स्थित नीच राशि का चन्द्रमा मदिरापान की ओर उन्मुख कर सकता है। सामान्यतः जातक मौसम सम्बन्धी बीमारियों के प्रति संवेदनशील होता है। मौसम परिवर्तन के साथ ही खाँसी-जुकाम जैसी समस्याएँ देखने को मिल सकती हैं।

द्वितीय भाव कुटुम्ब भाव है। इस भाव में नीच राशिस्थ चन्द्रमा कुटुम्बीजनों से अच्छे सम्बन्धों में बाधक बनता है।

कर्मेश चन्द्रमा का धनभाव में स्थित होना अपने कर्म के बल पर धन संग्रह के लिए प्रेरित करता है, परन्तु नीच राशि का होने के कारण जातक को कर्म में अपेक्षित प्रतिफलों की प्राप्ति नहीं हो पाती और उसे अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अधिक परिश्रम के उपरान्त ही उसे सफलता मिलती है।

कर्मेश चन्द्रमा का सम्बन्ध यदि लग्नेश शुक्र, चतुर्थेश-पंचमेश शनि अथवा भाग्येश बुध के साथ हो रहा हो, तो यह राजयोगकारक होता है और उसके चलते चन्द्रमा के केन्द्राधिपत्य दोष का निराकरण भी हो जाता है।

यदि चन्द्रमा का सम्बन्ध मंगल से हो रहा हो, तो चन्द्रमा के अशुभ फलों में अन्तर देखने को मिलता है। वाणी-व्यवहार एवं रिश्तों के सम्बन्ध में यह प्रायः शुभ फलदायक नहीं होता, परन्तु कॅरिअर के सम्बन्ध में कुछ हद तक अनुकूल होता है।

द्वितीय भाव में नीच राशि का चन्द्रमा यदि गुरु के साथ सम्बन्ध बनाता है, तो वाणी, व्यवहार और रिश्तों में कुछ राहत मिलती है, परन्तु कॅरिअर में उसका कोई विशेष अनुकूल प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं होता।

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