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रुद्राक्ष धारण का पर्व है श्रावण मास!

Jyotish Sagar

|

July 2025

तेरहमुखी रुद्राक्ष धारण करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। चौदहमुखी रुद्राक्ष श्रीकण्ठ है। इसके धारण करने से पूर्वजों का उद्धार होता है।

श्रावण मास शिवोपासना, जलाभिषेक एवं रुद्राक्ष धारण के विशेष पर्व के रूप में जाना जाता है। श्रावण मास की महिमा इसलिए है, क्योंकि यह शिव का महीना है। समुद्र मंथन में जब विष निकला और उसे भगवान् शिव ने गले में धारण किया, तब उस विष की भीषण गर्मी एवं ज्वाला से बचने के लिए गंगा जी ने भगवान् उनका लगातार अभिषेक किया तथा उपस्थित देवता आदि ने भी शिव का जलाभिषेक कर उन्हें राहत पहुँचाने का प्रयास किया। यह घटना श्रावण मास की थी। इसलिए तब से श्रावण मास में भगवान् शिव का जलाभिषेक कर उनकी पूजा-उपासना की जाती है। इससे शिव प्रसन्न होते हैं। भगवान् शिव को प्रिय रुद्राक्ष के धारण के लिए भी यह माह विशेष मुहूर्त के रूप में देखा जाता है। महात्माओं के श्रीमुख से यह सुना गया है कि श्रावण मास में रुद्राक्ष धारण किए बिना शिवाराधना अधूरी है। इसलिए श्रावण में रुद्राक्ष धारण का प्रचलन बहुत अधिक है। यदि पहले से ही रुद्राक्ष धारण किया हुआ है, तो भी श्रावण मास में कोई न कोई नया रुद्राक्ष अथवा रुद्राक्ष माला अवश्य धारण करनी चाहिए।

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