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प्राचीन सभ्यताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
Jyotish Sagar
|February 2025
मिस्र के पिरामिड़ों की नाप-जोख भी बड़ी रहस्यमयी रही है। इसकी ऊँचाई को 10° से गुणा करने पर जो संख्या आती है, वह पृथ्वी से सूर्य की दूरी को प्रदर्शित करती है।
आदिकाल से अखिल ब्रह्माण्ड रहस्य को घेरे में रखा है। विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में प्राचीन काल में ज्ञान-विज्ञान, कला कौशल, अध्यात्म आदि पर काफी शोधपूर्ण कार्य किया। उनकी उपलब्धियाँ आज भी विज्ञान के लिए अनुसंधान के नए आयाम प्रस्तुत करती है।
मैक्सिको, मिस्र (इजिप्ट), रोम, यूनान, भारत, चीन एवं पीरू आदि देशों की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियाँ सदैव से रहस्यमयी रही हैं। जिस जगत् में हम जीते हैं, वह जितना व्यक्त है, उससे कहीं अधिक अव्यक्त है। जितना प्रकट है, उससे अधिक अप्रकट है। जितना दृश्य है, उतना अदृश्य जगत् सभी है। जितना उद्घाटित है, उससे कहीं अधिक रहस्यमय है। यद्यपि आज विज्ञान ने काफी प्रगति की है, परन्तु वह सम्पूर्ण नहीं है। मानव का यह मानना है कि विज्ञान का इतना विकास मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास में कभी नहीं हुआ, सबसे बड़ी भूल होगी। एआई एवं रोबोटिक विज्ञान काफी कृत्रिम है, नैसर्गिक नहीं।
सभ्यता का इतिहास एक सागर की लहर की तरह होता है। लहर नीचे से उठती है और क्रमश: ऊपर की ओर उठती हुई एक विशेष ऊँचाई तक जाती है और फिर नीचे गिरने लगती है। इसी प्रकार सभ्यताओं के उत्थान-पतन एवं उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं।
मिस्र के रहस्यमय पिरामिड उदाहरण के लिए मिस्र के पिरामिडों को ही लें। आज से लगभग 6,000 वर्ष पूर्व इनका निर्माण मिस्र के तत्कालीन राजाओं ने किया था। आज वैज्ञानिकों के पास शिल्पकला सम्बन्धी सभी उपकरण हैं, पर मिस्र के जैसा पिरामिड नहीं बना सके।
このストーリーは、Jyotish Sagar の February 2025 版からのものです。
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