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जन्मपत्रिका में कही आप मंगली तो नहीं?

Jyotish Sagar

|

February 2023

यदि इन भावों में विराजमान मंगल यदि स्वक्षेत्री हो, उच्च राशि में स्थिति हो, अथवा मित्र क्षेत्री हो, तो दोषकारक नहीं होता है।

- रेखा कल्पदेव

जन्मपत्रिका में कही आप मंगली तो नहीं?

[फलित ज्योतिष पर विशेष ]

दि किसी जातक की जन्मकुण्डली में लग्न अर्थात् प्रथम भाव, बारहवें भाव, पाताल यानि चतुर्थ भाव जामित्र यानी सप्तम भाव तथा अष्टम में मंगल बैठा हो, तो कन्या अपने पति के लिए तथा पति कन्या के लिये घातक होता है। इसे ‘मंगली दोष' कहते हैं।

यदि वर की जन्मपत्रिका में धन अर्थात् दूसरे, सुत अर्थात् पंचम, सप्तम यानि पत्नी भाव, अष्टम अर्थात् मृत्यु भाव और व्यय यानि द्वादश भाव में मंगल विराजमान हो, तो वह उसकी स्त्री का विनाश करता है और यदि स्त्री की जन्मपत्रिका में इन्हीं स्थानों में मंगल विराजमान हो, तो वह 'विधवा योग' का कारक होता है। मंगल की इस प्रकार की स्थिति के कारण वर और कन्या का विवाह वर्जित है। आचार्यों ने एकादश भाव में स्थित मंगल को भी ‘मंगली' की उपाधि दी है।

मंगली दोष परिहार

● जन्मपत्रिका के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, एकादश और द्वादश भावों में किसी में भी मंगल विराजमान हो, तो वह विवाह को विघटन में बदल देता है। यदि इन भावों में विराजमान मंगल यदि स्वक्षेत्री हो, उच्च राशि में स्थिति हो, अथवा मित्र क्षेत्री हो, तो दोषकारक नहीं होता है।

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