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एफपीआई क्यों कर रहे हैं बिकवाली?

Business Standard - Hindi

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September 01, 2025

मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल मंदी की भावना को मजबूत करता है लेकिन शेयर बाजार में विशुद्ध प्रवाह के शून्य होने की प्राथमिक वजह यह नहीं है। बता रहे हैं आकाश प्रकाश

- आकाश प्रकाश

वि गत पांच वर्षों से भारत में सार्वजनिक इक्विटी यानी शेयर बाजारों में शुद्ध विदेशी निवेश शून्य रहा है। यह अवधि असाधारण रूप से लंबी है। इस वर्ष भी निवेश प्रवाह में 13 अरब डॉलर की गिरावट देखने को मिली।

भारतीय शेयरों में विदेशी स्वामित्व पिछले 15 साल में सबसे निचले स्तर पर जा पहुंचा है। भारत अब एक ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां सभी क्षेत्रीय, वैश्विक और उभरते बाजारों वाले फंड्स ने अपने निवेश को कम कर दिया है। दूसरी तरफ, पांच वर्ष की इस अवधि में घरेलू निवेश प्रवाह 185 अरब डॉलर से अधिक रहा है। जिस समय विदेशी निवेशकों की रुचि कम हो गई, उसी समय घरेलू निवेशक पहले से कहीं अधिक आशावादी और सक्रिय हो गए हैं। विदेशी पूंजी की निवेश में रुचि घटने की क्या वजह हो सकती है? इसकी एक आंशिक वजह उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति घटती रुचि है। उभरते बाजारों की इक्विटी में निवेश करना पिछले कुछ वर्षों में बेहद निराशाजनक रहा है। इसने अमेरिका और वैश्विक इक्विटी की तुलना में काफी खराब प्रदर्शन किया है। यदि किसी ने 15 वर्ष पहले उभरते बाजारों की इक्विटी में 100 डॉलर का निवेश किया होता, तो आज उसकी कीमत लगभग 180 डॉलर होती, जबकि वही राशि यदि वैश्विक सूचकांकों में निवेश की जाती, तो आज लगभग 500 डॉलर होती।

हालांकि, इस नज़रिये से देखें तो भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले पांच वर्षों में एमएससीआई इंडिया ने डॉलर में लगभग 15 फीसदी का वार्षिक रिटर्न दिया है, जबकि व्यापक ईएम सूचकांक ने मात्र 5 फीसदी का रिटर्न दिया है।

कई निवेशकों ने उभरते बाजारों की परिसंपत्ति में भरोसा गंवा दिया है और अपना निवेश कम किया है जबकि अपने बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारत फंडिंग का जरिया बना रहा। भारत की तेजी में अमेरिकी एंडोमेंट और फाउंडेशनों की अहम भूमिका रही लेकिन इस समय वे नकदी संकट से जूझ रहे हैं। निजी परिसंपत्तियों में अत्यधिक निवेश के कारण उनकी परिसंपत्ति और देनदारी में विसंगति उत्पन्न हुई और उन्हें सार्वजनिक इक्विटी बेचकर पूंजी जुटाने पर विवश होना पड़ा। भारत फंडिंग का स्वाभाविक स्रोत बना रहा क्योंकि उसका प्रदर्शन और मूल्यांकन लगातार ऊंचा रहा।

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