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रबी फसलों के एमएसपी की घोषणा
Open Eye News
|October 2024
देश में 1966-67 में सबसे पहले गेहूं की सरकारी खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की गई थी। आज से लगभग 60 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक अगस्त 1964 को एलके झा की अध्यक्षता में इसके लिए कमेटी घटित की थी।
बुवाई से पहले या बुवाई के समय फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि किसानों को कौन सी फसल लेना लाभकारी रहेगा इस पर सोच विचार कर निर्णय करने का अवसर मिल जाता है। पिछले कुछ सालों से केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ हो या रबी लगभग इनके बुवाई के समय ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी जाती है। इसे सरकार की सकारात्मक पहल भी कहा जा सकता है। केन्द्र सरकार ने रबी सीजन की गेहूं, सरसों सहित छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है। एमएसपी की घोषणा करते समय यह भी दावा किया गया है कि इन सभी छहों फसलों के एमएसपी का निर्धारण लागत से अधिक किया गया है जिससे किसानों के लिए यह फसलें लाभकारी सिद्ध हो सके। दावों की माने तो लागत की तुलना में सर्वाधिक 105 प्रतिशत अधिक एमएसपी गेहूं की घोषित की गई है, सबसे कम कुसुम की लागत से 50 प्रतिशत अधिक है तो चना और जौ की लागत से 60 फीसदी अधिक घोषित की गई है। सरसों की लागत से 98 फीसदी तो मसूर की 89 प्रतिशत अधिक राशि तय की गई है। निष्कर्ष रुप से यह कहा जा सकता है कि लागत की तुलना में सभी छह फसलों की एमएसपी दरों में उल्लेखनीय बौतरी की गई है। एमएसपी की घोषणा करते समय सरकार ने लागत में खाद-बीज, कीटनाशक, सिंचाई पर व्यय के साथ ही मानव श्रम का भी समावेश किया गया है। ऐसे में लागत से अधिक राशि मिलना किसानों के लिए लाभकारी हो सकता है। देश में 1966-67 में सबसे पहले गेहूं की सरकारी खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की गई थी। आज से लगभग 60 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक अगस्त 1964 को एलके झा की अध्यक्षता में इसके लिए कमेटी घटित की थी। गेहूं की समर्थन मूल्य प
このストーリーは、Open Eye News の October 2024 版からのものです。
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