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भारतीय संस्कृति में दिवाली के विविध रंग
DASTAKTIMES
|November 2023
दीपावली का त्योहार इस बात का प्रतीक है कि हम इन दीपों से निकलने वाली ज्योति से सिर्फ अपना घर ही रोशन न करें वरन् इस रोशनी में अपने हृदय को भी आलोकित करें और समाज को राह दिखाएं। दीपक सिर्फ दीपावली का ही प्रतीक नहीं वरन् भारतीय सभ्यता में इसके प्रकाश को इतना पवित्र माना गया है कि मांगलिक कार्यों से लेकर भगवान की आरती तक इसका प्रयोग अनिवार्य है।
भारतीय संस्कृति में उत्सवों और त्योहारों का आदिकाल से ही महत्व रहा है। हर संस्कार को एक उत्सव का रूप देकर उसकी सामाजिक स्वीकार्यता को स्थापित करना भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है। दीपावली भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्योहार है जिसका बेसब्री से इंतजार किया जाता है। दीपावली माने 'दीपकों की पंक्ति' । दीपावली पर्व के पीछे मान्यता है कि रावण-वध के 20 दिन पश्चात भगवान राम, अनुज लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ चौदह वर्षों के वनवास के पश्चात अयोध्या वापस लौटे थे। जिस दिन श्रीराम अयोध्या लौटे, उस रात्रि कार्तिक मास की अमावस्या थी अर्थात आकाश में चांद बिल्कुल नहीं दिखाई दे रहा था। ऐसे माहौल में नगरवासियों ने भगवान राम के स्वागत में पूरी अयोध्या को दीपों के प्रकाश से जगमग करके मानो धरती पर ही सितारों को उतार दिया। तभी से दीपावली का त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज भी दीपावली के दिन भगवान राम, लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ अपनी वनवास स्थली चित्रकूट में विचरण कर श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। यही कारण है कि दीपावली के दिन लाखों श्रद्धालु चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में डुबकी लगाकर कामदगिरि की परिक्रमा करते हैं और दीप दान करते हैं।
このストーリーは、DASTAKTIMES の November 2023 版からのものです。
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