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मेरे गुरुदेव की महिमा अवर्णनीय है

Rishi Prasad Hindi

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November 2020

अपने आत्मा-परमात्मा के साथ नाता जोड़ने की सहायता जो पुरुष देते हैं, वे चिरआदरणीय होते हैं।

- पूज्य बापूजी

मेरे गुरुदेव की महिमा अवर्णनीय है

ब्रह्मलीन भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज का महानिर्वाण दिवस : २३ नवम्बर

इन्द्रिय-संयम की प्रतिमूर्ति

पीजा खा लिया, फलाना खा लिया... मन ललचाया और खा लिया । नहीं... क्या खाना, कब खाना, कितना खाना और कैसे खाना ? इसकी सूझबूझ के अनुसार इन्द्रियों को संयत करना चाहिए।

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