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Modern Kheti - Hindi
हरे चारे के लिए जई की खेती
पशुओं के लिए पर्याप्त गुणवत्ता युक्त हरा चारा उपलब्ध न होने की वजह से उनकी उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
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September 15, 2020
Modern Kheti - Hindi
मिलावटी खाद्य पदार्थ ये मानव स्वास्थ्य को पहुंचाते हैं हानि
अधिकतर अनाज, दालों, मसालों, चाय, कॉफी, चीनी आदि में इनकी मात्रा बढ़ाने हेतु रेत, मिट्टी, कंकड़, पत्थर, तिनके आदि मिलाए जाते हैं। सस्ती व सर्वसुलभता के कारण खेसारी की दाल अरहर व चना की दाल, पिसे हुए बेसन तथा उसके व्यंजनों में मिलाई जाती है।
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September 15, 2020
Modern Kheti - Hindi
प्याज व लहसुन में परिपक्वता का करें सही चुनाव
किसान भाई कभी भी लहसुन व प्याज की खुदाई अपरिपक्व अवस्था में न करें अन्यथा कंदों की गुणवत्ता व भंडारण क्षमता कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय पर विपरीत प्रभाव आ सकता है। पत्तियों पर पीलापन व सुखना शुरू होने पर सिंचाई बंद कर दें। इसके कुछ दिन बाद लहसुन की खुदाई शुरू करें।
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September 15, 2020
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उचित फसल चक्र अपनाएं, मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं
फलीदार फसलों को फसल चक्र में सम्मिलित करने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट नहीं होती क्योंकि दलहनी फसलों का प्रयोग करने से नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकण होता है जिससे मृदा नाइट्रोजन के मामले में आत्मनिर्भर बनती है।
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September 15, 2020
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डेयरी पशुओं का चुनाव
पशुपालकों का एक सवाल होता है कि वह डेयरी फार्म के लिए गाय रखें या भैंस ताकि वह साल भर दूध उत्पादन कर सकें तथा दूध की गुणवत्ता भी बनी रहे व उसे दूध का अच्छा मूल्य भी मिल सके। इसके लिए जरूरी है कि हम दोनों प्रकार के पशुओं के गुणों को जानें।
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September 15, 2020
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कृषि उत्पादों के निर्यात में भारी वृद्धि
गेहूं उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है। लेकिन निर्यात में 34वें स्थान पर है। इसी तरह सब्जियों के उत्पादन में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश जरूर है, लेकिन निर्यात के मामले में 14वें स्थान पर है।
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September 01, 2020
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चना की वैज्ञानिक खेती
चने की फसल में बीज शोधन हेतु दो ग्राम थीरम के साथ 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम का मिश्रण प्रति कि.ग्रा.बीज की दर से प्रयोग करते हैं। इसके पश्चात बीज को चने के विशिष्ट राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए।
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September 01, 2020
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फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और निदान
अन्य पोषक तत्वों की भांति सूक्ष्म पोषक तत्व फसल एवं उससे प्राप्त होने वाली उपज पर प्रभाव डालते हैं।
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September 01, 2020
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बकरी पालन में उत्तम प्रणाली द्वारा अधिक लाभ के अवसर
समस्त पशुधन प्रजातियों में बकरी एक महत्वपूर्ण बहुउपयोगिता वाला पशु जिसका पालन दूध एवं मांस के दोहरे उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया जाता है।
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September 01, 2020
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जौ की खेती का आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
अगर किसान भाईयों को कम लागत से अधिक आर्थिक लाभ लेना हो तो उनको ऐसा फसल चक्र अपनाना चाहिए जिससे एक साल में तीन फसलें उगा सकें धान के बाद जौ की फसल लें और जौ के बाद मूंग की फसल लेना सबसे उपयुक्त होगा। या फिर कोई और फसल चक्र अपनाएं जिससे जौ के साथ एक वर्ष में तीन फसलें मिल सकें। ऐसा करने से किसान को लाभ तो होगा ही, साथ ही साथ भूमि की दशा में भी सुधार होगा। जौ में सिंचाई की भी कम आवश्यकता होती है जिससे पानी की बचत होगी और इस पानी का प्रयोग जायद में मूंग की फसल लेने में कर सकते हैं।
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September 01, 2020
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मनरेगा की कृषि एवं ग्रामीण विकास में भूमिका
महात्मा गांधी के स्वप्न के अनुसार देश का विकास तभी संभव है जब देश के प्रत्येक मनुष्य तक रोजगार की पहुंच होगी। वर्ल्ड बैंक के अनुसार मनरेगा विश्व में पहली ऐसी स्कीम है जो गरीबी के उत्थान में सहायक है।
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September 01, 2020
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पहली शहद परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुजरात के आणंद जिले में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के परिसर में सरकार की पहली शहद परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि इससे घरेलू और वैश्विक बाजारों में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित होंगे और किसानों को भी अपने उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य मिल सकेंगे।
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August 15, 2020
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इन-सीटू पुआल प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनें
"भारत सरकार की ओर से फसलों के अवशेष के रखरखाव के लिए हरियाणा, पंजाब, यू.पी. एवं राजस्थान के किसानों को राज्य सरकारों द्वारा इन-सीटू प्रबंधन के लिए विशेष सब्सिडी पैकेज दिया जा रहा है ताकि किसान इनसीटू पुआल प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी खरीद सकें।"
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August 15, 2020
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अमरूद के विभिन्न रोग व कीट
अमरूद भारतवर्ष में एक लोकप्रिय फल है। अमरूद विटामिन सी, लाइकोपिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। इसमें केले के बराबर मात्रा में पोटाशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में मदद करता है।
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August 15, 2020
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किसान की आय कैसे बढ़े ?
किसान उत्पादक है और खेत तैयार कर बीज बोने से लेकर, अंतिम उत्पाद तैयार होने तक की सभी गतिविधियों की व्यवस्था करता है। कंपनी कार्यशैली की दृष्टि से देखो तो उसका कार्य मैनेजर-प्रबंधक जैसा है। वह सर्वप्रथम स्थायी पूंजी (फिक्स्ड कैपिटल) यानी कि जमीन का फसल उत्पादन हेतु निवेश करता है।
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August 15, 2020
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देश में चली पहली किसान ट्रेन
भारतीय रेलवे और कृषि मंत्रालय के संयुक्त प्रयास के बाद स्पेशल किसान ट्रेन की शुरूआत की जा रही है। यह स्पेशल पार्सल ट्रेन की तरह होगी। इसमें किसान और व्यापारी इच्छा के अनुरूप माल की लदान कर सकेंगे।
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August 15, 2020
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भारत टॉप-5 एग्री गुड्स एक्सपोर्टर्स में शामिल हो सकता है
कृषि निर्यात की दिशा में हमने प्रगति तो की है लेकिन जो भी प्रगति हुई है, वह हमारी क्षमता के मुकाबले बहुत कम है
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August 15, 2020
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मृदा जैविक कार्बन क्या है ? मृदा में जैविक कार्बन ह्रास एक प्रमुख समस्या
मृदा में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों में वांछित कार्बन को मृदा जैविक कार्बन कहते हैं। मृदा में मिलाये गये अथवा उपस्थित वानस्पतिक व जंतु अवशेष, सूक्ष्म जीव, कीड़े, मकोड़े, अन्य जंतुओं के मृत शरीर, मृदा में मिलाये जाने वाले खाद (जैसे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट हरी खाद, राख पशुओं की बिछावन आदि मृदा कार्बनिक पदार्थ कहलाते हैं।
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August 15, 2020
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स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है बकरी का दूध
बकरियां, पशुधन उद्योग का महत्वपूर्ण घटक हैं। कठोर मौसम की अनुकूलनशीलता उन्हें भूमिरहित और सीमांत किसानों की आजीविका के लिए उपयुक्त साधन बनाती है। दूध और दूध उत्पादों की आपूर्ति तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य में बकरियों का योगदान एवं भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
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August 15, 2020
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खरीफ फसलों की देखभाल
खरीफ फसलों में अगस्त का महीना फसल की अंतिम उत्पादकता का दर्पण होता है। यह महीना फसलों की निराई-गुड़ाई, खड़ी फसल में यूरिया खाद देना, पोषक तत्वों की कमी की पहचान तथा उसकी रोकथाम आदि के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
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August 1, 2020
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क्या भारत फिर कृषि प्रधान बनेगा?
समाज में किस्सागोई का अपना महत्व है। ये किस्से अक्सर दीर्घकालीन बदलावों का सशक्त संकेत देते हैं। कुछ दशकों पहले जब किसान अपने खेतों से कीटों के गायब होने और परागण न होने की चर्चा करते थे, तब कहानियों से ही पता चला था कि इन कीटों की विलुप्ति से खेती पर नकारात्मक असर पड़ा रहा है।
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August 1, 2020
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धान की बीमारी को कैसे नियंत्रित करें
धान की बीमारी को कैसे नियंत्रित करें
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August 1, 2020
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एमएसपी से आधी कीमत पर मक्का बेचने को मजबूर किसान
कोविड-19 से लड़ने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन का असर मक्का किसानों पर देखने को मिल रहा है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य तो दूर, मक्का बेचकर लागत तक नहीं मिल पा रहा है। इस वक्त मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन सिवनी के मोहन सिंह ने कृषि उपज मंडी सिमरिया पर 5 जून को 1020 रुपए में अपना मक्का बेचा।
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August 1, 2020
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फार्म मशीनीकरण का बाजार और तकनीकी द्वारा कृषकों की आय में अभिवृद्धि
फार्म मशीनीकरण न केवल श्रम समय और कटाई के उपरांत हानि को कम करता है, बल्कि लंबी अवधि में उत्पादन लागत में कटौती करने में भी मदद करता है।
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August 1, 2020
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मिर्ची के महत्वपूर्ण रोग एवं प्रबंधन
यह रोग नर्सरी में नवजात पौधों को भूमि की सतह पर आक्रमण पहुंचाता है। रोग से पौधे अंकुरण से पहले और बाद में भी मर जाते हैं। ग्रसित पौधे सूख कर जमीन की सतह पर गिर जाते हैं। पानी की अधिकता से रोग की उग्रता बढ़ जाती है।
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August 1, 2020
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पौष्टिकता से भरपूर सेंजना की खेती किसान के लिए मुनाफे का सौदा
सहजन, ड्रमस्टिक, मुनगा, सहिजन, सेंजना, मुरिंगा, गठीगना, सिंहफली आदि नामों से जाना जाता है। यह किसानों के लिए एक बहुवर्षीय सब्जी देने वाला जाना-पहचाना पौधा है।
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July 15, 2020
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कृषि पर कोरोना के दुष्प्रभाव एवं संभावित समाधान
भारतीय कृषि क्षेत्र, जो हाल ही में असमान मानसून के कारण पीड़ित था, कोरोना वायरस के विघटन के कारण एक और समस्या का सामना कर रहा है। जिन किसानों ने रबी मौसम की फसलें (मुख्य रूप से गेहूं, सरसों और दलहन) उगाई थीं, उन्होंने हाल ही में असमय और भारी वर्षा के कारण अपनी फसलों के नुकसान की शिकायत की थी।
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July 15, 2020
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जैविक खेती का आधार-जीवाणु कल्चर
जैविक खेती हमारे देश में प्राचीन काल से ही की जाती रही है। उस समय खेतों को उपजाऊ बनाने के लिए जैविक खेती के अलावा कोई अन्य साधन उपलब्ध नहीं था।
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July 15, 2020
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मूंग की उन्नत किस्में व कृषि क्रियाएं
एक एकड़ के बीज को छाया में पक्के फर्श पर फैलाकर बह धोल अच्छी तरह बीज में मिला दें ताकि प्रत्येक वीज पर गुड़ का घोल चिपक जाए। इसके बाद राइजोबियम के पैकेट को खोलकर गुड़ लगे वीज पर डालें तथा हाथों से सारे बीज में मिला दें। कल्चर लगे बीज को छाया में सुखाकर बिजाई करें।
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July 15, 2020
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लोबिया की खेती
लगभग सभी प्रकार की भूमियों में इसकी खेती की जा सकती है। मिट्टी का पी.एच.मान 5 से 6.5 उचित है। भूमि में जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा क्षारीय भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है।
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