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गोरखनाथजी के तीन अनोखे सवाल

Rishi Prasad Hindi

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March 2025

योगी गोरखनाथ अपने प्यारे शिष्य के साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते में प्यास लगी तो कुएँ पर पानी पीने गये। खेत में ज्वार के दाने चमक रहे थे, किसान ज्वार को पानी पिला रहा था। गोरखनाथजी ने पानी पिया और किसान से पूछा : "ज्वार खा ली है कि खानी बाकी है?"

- पूज्य बापूजी

गोरखनाथजी के तीन अनोखे सवाल

किसान ने कहा : “महाराज ! अभी तो लगी है, एक-दो बार और पानी दूँगा, पकेगी, कटेगी फिर घर ले जाऊँगा, पीसूँगा तब खाऊँगा।"

गोरखनाथजी ने फिर पूछा : "खाना बाकी है कि खा ली है?'

किसान हाथ जोड़कर चुप रह गया, गोरखनाथजी चल दिये। शिष्य को कौतूहल हुआ कि 'गुरुजी क्या पूछ रहे हैं? अभी खेत में लगी है ज्वार और पूछते हैं, खा ली कि खानी बाकी है?'

जाते-जाते देखा कि नगर से कोई अर्थी निकल रही है : 'राम बोलो भाई राम ! राम बोलो भाई राम !' बहुत लोग जा रहे थे उस आखिरी यात्रा में। गोरखनाथजी ने किसी व्यक्ति को रोका और पूछा : "यह किसकी अर्थी है ?"

बोले : 'नगरसेठ की है। कल रात को मरे लेकिन बड़े आदमी हैं तो जरा भीड़भाड़ ज्यादा होती है इसलिए आज दोपहर को ले जा रहे हैं।"

"अच्छा तो यह जिंदा है कि मर गया ?"

बोले : "महाराज ! उनकी अर्थी है।"

"वह तो ठीक है किंतु यह मुर्दा जिंदा है कि मर गया?"

"महाराज ! आप ही कहते हो मुर्दा, फिर पूछते हो कि जिंदा है कि मर गया। महाराज ! आपकी भाषा आप ही जानो।'

Rishi Prasad Hindi

यह कहानी Rishi Prasad Hindi के March 2025 संस्करण से ली गई है।

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