कोशिश गोल्ड - मुक्त
आत्मकारक ग्रह बनाम कर्मों की गठरी
Jyotish Sagar
|August 2025
शनि के आत्मकारक ग्रह होने की स्थिति में जातक को जीवनभर कठिन मेहनत करके संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर शनि की महादशा में अत्यधिक संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है।
न जायते म्रियते वा कदाचिन्, नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो, न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।
अर्थात् आत्मा न जन्मती है, न मरती है, यह नित्य और शाश्वत है। यह शरीर के नष्ट होने पर भी नहीं मरती।
किसी भी जन्मपत्रिका में जातक की आत्मा को परिभाषित करने वाला ग्रह आत्मकारक ग्रह कहलाता है। जन्मपत्रिका में जातक के पूर्वजन्म के कर्मों के आधार पर ही विधाता के द्वारा आत्मकारक ग्रह का निर्धारण होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा का कारक कहा जाता है, अर्थात् सूर्य सभी जातकों की जन्मपत्रिकाओं में नैसर्गिक आत्मकारक ग्रह है, लेकिन जैमिनि के अनुसार, इस नैसर्गिक आत्मकारक ग्रह के अलावा, अलग-अलग जातकों की जन्मपत्रिकाओं में, उनके वर्तमान जीवन में क्रियाशील अलग-अलग आत्मकारक ग्रह भी होते हैं। जन्मपत्रिका में जो ग्रह सर्वाधिक अंशों पर होता है, वही जातक के वर्तमान जीवन के लिए आत्मकारक ग्रह की भूमिका अदा करता है। बहुत सारे ज्योतिषाचार्य छाया ग्रह राहु-केतु को आत्मकारक ग्रह का पद प्रदान नहीं करते, अर्थात् वे सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि में से ही जिसकी डिग्री सर्वाधिक होती है, उसे आत्मकारक ग्रह की पदवी प्रदान करते हैं। इसे सात चर कारक विधि कहा जाता है, लेकिन अनेक ज्योतिषाचार्य आठ चर कारक विधि का उपयोग करते हुए सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु में से जिसकी डिग्री सर्वाधिक होती है, उसे आत्मकारक ग्रह कहते हैं।
चूँकि राहु की गति सदैव वक्री होती है, इसलिए आठ चर कारक विधि में, आत्मकारक ग्रह की खोज करते समय, राहु की जितनी भी डिग्री होती है, उसे पहले 30° में से घटा लिया जाता है। केतु को किसी भी विधि में नहीं लिया जाता।
पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम्। इह संसारे बहुदुस्तारे, कृपयाऽपारे पाहि मुरारे।।
अर्थात् पुनः जन्म, पुनः मृत्यु, पुनः माँ के गर्भ में रहना! संसार की इस प्रक्रिया को पार करना वास्तव में कठिन है। हे मुरारी, कृपया अपनी दया से मेरी रक्षा करें।
यह कहानी Jyotish Sagar के August 2025 संस्करण से ली गई है।
हजारों चुनिंदा प्रीमियम कहानियों और 10,000 से अधिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों तक पहुंचने के लिए मैगज़्टर गोल्ड की सदस्यता लें।
क्या आप पहले से ही ग्राहक हैं? साइन इन करें
Jyotish Sagar से और कहानियाँ
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Listen
Translate
Change font size

