Facebook Pixel अमेरिका में भारतीय आम 'एहसास' हैं... पहुंचने से पहले ही बुक; कारोबारी बोले- मुनाफे की चिंता नहीं, असली मजा तो उस खुशबू में है जो लोगों को बचपन की गलियों में ले जाती है | Dainik Bhaskar Satna - newspaper - इस कहानी को Magzter.com पर पढ़ें

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अमेरिका में भारतीय आम 'एहसास' हैं... पहुंचने से पहले ही बुक; कारोबारी बोले- मुनाफे की चिंता नहीं, असली मजा तो उस खुशबू में है जो लोगों को बचपन की गलियों में ले जाती है

Dainik Bhaskar Satna

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June 25, 2025

न्यूयॉर्क | नेवार्क एयरपोर्ट की चिलचिलाती गर्मी में याकिन शाह पसीने से तर-बतर थे। सनग्लासेस के पीछे उनकी आंखें बार-बार फोन की स्क्रीन पर टिक रही थीं, मानो कोई बड़ी खबर आने वाली है। दरअसल वह दो घंटे से इंतजार कर रहे थे ... पुणे से दुबई होते हुए आने वाली 800 बॉक्स आमों की खेप का, जिसकी बुकिंग पहले ही हो चुकी थी। पर डिब्बे उतरते ही शाह का चेहरा उतर गया।

फ्लाइट कैंसल, देरी और रेफ्रिजरेशन की कमी से कई बॉक्स गीले हो गए थे, कई टूटे थे। गुजरात के केसर आम बेरंग हो चुके थे और महाराष्ट्र के हापुस इतने नरम कि छूने से पिचक जाएं। फिर भी, शाह हताश होने के बजाए मुस्कुराए। फिर धीमी आवाज में

आम तो ग्राहकों को लुभाने के लिए हैं, फायदा तो मसाले से ...

कारोबारी भाविक मेहता ने रिटेल दिग्गज कॉस्टको से बात की, पर जवाब मिलता है कि भारतीय आम महंगे हैं और जल्द खराब होते हैं। ऐसे में छोटे भारतीय स्टोर व सीधे ग्राहक ही सहारा हैं। पर बॉक्स में एक आम खराब हुआ, तो स्टोर पूरा बॉक्स वापस लेता है, नुकसान इंपोर्टर को होता है। पटेल ब्रदर्स जैसे स्टोर 2 हजार बॉक्स बेचते हैं। मैनेजर मार्गी पटेल कहती हैं,'आम तो ग्राहकों को लुभाने के लिए हैं। मुनाफा तो मसाले व आटे से है।' आमों की वापसी का खर्च स्टोर उठाता है, ताकि ग्राहक खुश रहें।'

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यह कहानी Dainik Bhaskar Satna के June 25, 2025 संस्करण से ली गई है।

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