कोशिश गोल्ड - मुक्त
अमेरिका के कारोबारी झटके का रचनात्मक जवाब
Business Standard - Hindi
|September 02, 2025
अमेरिका ने भारत से होने वाले निर्यात पर जो शुल्क वृद्धि की है, उसका मुकाबला करने के लिए हमें व्यापक नीतिगत सुधारों की जरूरत होगी। बता रही हैं अमिता बत्रा
अमेरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की राजनीति प्रेरित व्यापार नीति के चलते करीब एक महीने पहले भारत के निर्यात पर 50 फीसदी का असाधारण रूप से ऊंचा शुल्क लगाने की घोषणा की गई।
अब जबकि जुर्माने वाला शुल्क लागू हो चुका है तो भारतीय निर्यातकों को ट्रंप-पुतिनजेलेंस्की की बैठकों तथा अमेरिका के साथ स्थगित व्यापार वार्ता के नए सिरे से शुरू होने के बाद कुछ सकारात्मक नतीजों की उम्मीद है। अमेरिका भारतीय के प्रमुख निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। खासतौर पर कपड़ा एवं परिधान, सीफूड, रत्न एवं आभूषण जैसी चीजों के लिए, ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता जरूरी होगा।
यह बात उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन के अलावा ट्रंप द्वारा घोषित लगभग सभी द्विपक्षीय व्यापार समझौते कानून समर्थित नहीं हैं, उनके ब्योरे उलझे हुए हैं और इसलिए उनकी कई तरह की व्याख्याएं की जा सकती हैं। अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के क्रियान्वयन में टैरिफ लगाने की 'गलती' और मूल घोषणा के एक महीने बाद यूरोपीय संघ से वाहन आयात पर अमेरिका द्वारा 15 फीसदी टैरिफ का 'सशर्त' अनुप्रयोग, ऐसी अस्पष्टताओं के प्रमाण हैं। धारा 232 के तहत लंबित जांच और निरंतर वार्ता अमेरिकी व्यापार नीति की अनिश्चितता को बताती है। इसके साथ ही अमेरिकी व्यापार संरक्षण भी लागू रह सकता है क्योंकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में टैरिफ में जो इजाफा किया गया था उसे जो बाइडन ने कम नहीं किया था। ऐसे में भारत की व्यापार नीति की प्रतिक्रिया दीर्घकालिक नज़रिये पर आधारित होनी चाहिए।
यह कहानी Business Standard - Hindi के September 02, 2025 संस्करण से ली गई है।
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