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जातियों की सही स्थिति पता चलेगी, राजनीतिक इस्तेमाल का भी डर
Business Standard - Hindi
|May 12, 2025
जाति जनगणना एक जरूरी कदम है क्योंकि इससे समाज की वास्तविक स्थिति का आकलन हो सकेगा कि कौन कितनी संख्या में हैं, किस वर्ग ने कितना विकास किया और किसे अब भी अवसरों की ज़रूरत है। दूसरी ओर आरक्षण एक ऐसी 'घुंडी’ है जो जाति व्यवस्था को जड़ से मिटने नहीं देती। जब तक आरक्षण का आधार जाति रहेगा, जातिवाद भी बना रहेगा।
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समाज की वास्तविक स्थिति पता चलेगी
सुनील पोद्दार
भागलपुर, बिहार
सामाजिक संरचना के लिए है जरूरी
जाति जनगणना जरूर करनी चाहिए क्योंकि अपने राष्ट्र की सामाजिक संरचना सहित प्रत्येक जानकारी हमें होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने भी एक बार जातिगत आरक्षण की उपलब्धि सरकार से जाननी चाही थी लेकिन आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। सामाजिक संरचना ज्ञात होने पर न केवल उत्थान की योजनाएं बनाना आसान होगा बल्कि योजनाओं की उपलब्धियां मालूम करना भी आसान होगा।
ललित दुबे
रतलाम, मध्य प्रदेश
जाति जनगणना मौजूदा समय का तकाजा
भारतीय समाज में सामाजिक असमानता की जड़ें गहरी हैं। यहां बिना आंकड़ों के कोई भी कल्याणकारी नीति एवं विकासात्मक कार्यक्रम केवल अटकल बनकर रह जाती है। ऐसे में सामाजिक न्याय और समरसता मूलक समाज के लिए जातीय जनगणना समय की मांग है। जातिगत आंकड़े सिर्फ पहचान का मसला नहीं, बल्कि हिस्सेदारी और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की बुनियाद है।
डॉ. हर्ष वर्द्धन कुमार
पटना, बिहार
पिछड़ी जाति की आर्थिक प्रगति होगी
जाति जनगणना से पिछड़ी जाति को लाभ मिलेगा और आर्थिक प्रगति को भी पंख लगेंगे। इससे बहुत सी विसंगतियां भी दूर होंगी। भारत में यह जनगणना भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद होगी। इससे अप्रेक्षित समाज को तंगहाली में अब जीने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। खुशहाली भरा जीवन जनता को मिले, उन्हें सुविधाएं मिलें और उनकी क्या जरूरतें हैं ये भी पता चले।
हरिहर सिंह चौहान
इंदौर, मध्य प्रदेश
सामाजिक समरसता में सहायक
यह कहानी Business Standard - Hindi के May 12, 2025 संस्करण से ली गई है।
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