कोशिश गोल्ड - मुक्त
पति की मनमानी कब तक करें बरदाश्त
Sarita
|November Second 2025
पति और पत्नी का रिश्ता निहायत ही लोकतांत्रिक होता है जिस में किसी एक की भी मनमानी रिश्ते में खटास घोल सकती है और उसे तोड़ भी सकती है.
अब वह दौर गया जब पत्नियां पति की मनमानी को खामोशी से हजम कर लिया करती थीं. शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर होने के चलते वे पति की मनमानियां ज्यादा बरदाश्त नहीं कर पाती हैं.
पति की मनमानियों को पत्नियां कब तक बरदाश्त करें ? इस सवाल का सीधा सा और सटीक जवाब तो यह है कि तब तक कि जब तक सब्र जवाब न दे जाए और जीना मुहाल न हो जाए लेकिन इस के बाद क्या? इस सवाल का भी सीधा और सटीक जवाब यह है कि जब सब्र जवाब देने लगे और पति लाख कोशिशों के बाद भी मनमानी से बाज न आए तो तलाक ही इकलौता रास्ता बचता है पर यह आखिरी विकल्प उसी हालत में कहा जा सकता है जब यह
तय या साबित हो जाए कि क्या वाकई मनमानी नाकाबिले बरदाश्त थी और क्या पति को समझानेबुझाने के सारे तौरतरीके आजमाए जा चुके थे.
कुछ उदाहरणों से यह बात समझें कि मनमाने पति को कब तक बरदाश्त करें, जिस से यह समस्या हल हो सकती है.
अब से कुछ दिनों पहले आगरा का एक दिलचस्प मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था. एक महिला ने इस आधार पर तलाक चाहा था कि उस का पति नहाता नहीं है, जिस से उस के शरीर से काफी गंदी बदबू आती है. इस शादी को महज 40 दिन ही हुए थे कि महिला ने आगरा के परिवार परामर्श केंद्र में शिकायत की. शादीशुदा जीवन में पतिपत्नी के रिश्तों में दरार बहुत बार खराब आदतों के चलते भी आने लगती है. अकसर पत्नियों की शिकायत रहती है कि पति साफसफाई का ध्यान नहीं रखते.
उस का रोना यह था कि पति महीने में केवल एक या दो बार ही नहाता है जिस से उस में से असहनीय दुर्गंध आती है. जवाब में पति ने यह नहीं कहा कि वह रोज नहाता है बल्कि यह सफाई दी कि वह रोज शरीर पर गंगाजल छिड़कता है जिस से उस की शुद्धि हो जाती है. इस के बाद भी पत्नी के कहने पर वह एक महीने में 6 बार नहाया है.
मामला अभी अदालत में चल रहा है और उस का फैसला जो भी आए लेकिन यह सच है कि गंदे व मैलेकुचैले पति के साथ जिंदगी काटना किसी भी पत्नी के लिए आसान नहीं, खासतौर से उस वक्त जब वह इस बारे में सुनने और समझने को तैयार ही न हो. आगरा वाले पति ने परिवार परामर्श केंद्र के अधिकारियों की समझाइश पर यह वादा किया था कि वह रोज नहाएगा लेकिन पत्नी ने उस के वादे पर एतबार नहीं किया.
यह कहानी Sarita के November Second 2025 संस्करण से ली गई है।
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