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महिलाओं का संकट मोचन- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट
Sadhana Path
|September 2025
पिछले कुछ आंकड़ों के अनुसार भारतीय महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले स्तन और गर्भाशय कैंसर के रहे हैं। इन दोनों ही कैंसर के इलाज में कई तरह की जटिलताएं आती हैं, साथ ही इनकी मेमोग्राफी में भी काफी लंबा समय लग जाता है। हालांकि अब ए.आई. के माध्यम से इन बीमारियों के बारे में पूर्वानुमान लिया जा सकेगा।
यदि एक टेस्ट से यह पता चल जाए कि भविष्य में आप किस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं तो निश्चित रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे से बचा जा सकता है। हालांकि, इस तरह के प्रयोग और शोध भारत में शुरू हो गए हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका है। ए.आई. के माध्यम से होने वाले इस प्रयोग को चिकित्सा विज्ञान में 'प्रीडिक्टिव हेल्थकेयर' कहा जाता है।
प्रीडिक्टिव एनालिसिस
क्या है
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में होने वाले प्रीडिक्टिव एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में महिलाओं को जरूर जानना चाहिए क्योंकि यह उनकी और उनके परिवार की सेहत से जुड़ा विषय है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक जबरदस्त आविष्कार है और इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के साथ अनुसंधान एवं विकास, मार्केटिंग एवं विज्ञापन और बैंकिंग इत्यादि क्षेत्रों में भी हो रहा है। आप इन दिनों जिस चैट जीपीटी की बात कर रहे हैं वो भी इसी ए.आई. की ही देन है। यद्यपि आने वाले समय में इसके कई खतरे हैं लेकिन उस विषय में आपको बाद में बताएंगे। चलिए पहले जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा जगत में कैसे काम करता है और किन-किन गंभीर बीमारियों के बारे में यह पूर्वानुमान दे सकता है।
स्तन और सर्विकल कैंसर में लाभ
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट के माध्यम से बनी डिवाईस से सर्विकल (गर्भाश्य ग्रीवा) और स्तन का कैंसर के बारे में पता लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ए.आई. में स्तन कैंसर की पुष्टि 2 से 3 साल पहले ही हो जाएगी। दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि ए.आई. स्तन कैंसर के लिए करवाए जाने वाला टेस्ट- मैमोग्राम की पढ़ने की गति को बढ़ाएगा। परिणामस्वरूप रेडियोलॉजिस्ट एक निश्चित अवधि में अधिक मैमोग्राम को सटीक रूप से देख सकेगा। केवल इतना ही नहीं ए.आई. ब्रेस्ट कैंसर के उन पैटर्न को भी पहचान सकता है जिसे मनुष्य यानी रेडियोलॉजिस्ट की नजरें कई बार नहीं पहचान पाती हैं। इससे कैंसर के इलाज के नये तरीके ढूंढने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, ए.आई. मॉडल उन मामलों के अनुपात में भी कमी दिखाएगा जहां कैंसर की गलत पहचान की गई है।
यह कहानी Sadhana Path के September 2025 संस्करण से ली गई है।
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