कोशिश गोल्ड - मुक्त
धन्य है भारत और दैवी संस्कृति
Sadhana Path
|June 2025
देवभूमि कहलाने वाला भारत कहां स्वर्ग कहा जाता था, अब नर्क बनता जा रहा है। दिव्यगुणधारी देवी-देवताएं इसे आभामय बनाए रखते थे। भारतवासियों की आभामय स्थिति लुप्त हो गई तो अब इसे हिन्दुस्तान, इंडिया आदि कहा जाने लगा। भारत का अर्थ ही है कि जहां के रहवासी आध्यात्मिक आभा से प्रकाशमान हों। आत्मिक वृत्ति द्वारा परमात्म स्मृति बनाने से ही जीवन आभामय बनता है। प्रश्न उठता है कि देवी-देवताएं थे कौन ?
देवभूमि भारत के सतयुगी व त्रेतायुगी नर-नारी देवी-देवता कहलाते थे। आज तो लोग उन्हें आकाश के रहवासी मानते हैं। वास्तव में पुरुषोत्तम संगम युग पर जो राजयोगी आत्माएं परमधामवासी परमात्मा की लगन में मगन होकर कार्य-व्यवहार में आती हैं अर्थात् सूक्ष्म रूप से परमपिता परमात्मा के साथ के अनुभव में खोई रहती हैं, उन्हें ही लोग द्वापर-कलियुग में ऊपर वालों के रूप में याद करते हैं। वैकुंठनाथ कहलाने वाले श्री कृष्ण, श्री राम व उनकी वंशावलियां जब भारत में ही थी, तो देवी-देवताओं को आसमान में क्यों ढूंढा जाए ? सच में हम भारतवासियों के ही पूर्वज देवी और देवता थे।
यह कहानी Sadhana Path के June 2025 संस्करण से ली गई है।
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