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मां तुझे प्रणाम

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May 2025

'मां' केवल जन्मदात्री नहीं है बल्कि 'मां' निर्मात्री भी है। मां का ओहदा सभी धर्मों में सबसे ऊपर माना गया है। 'मां' वो है जिसके आगे देवता भी सिर झुकाते हैं। 'मां' वो है जिसके ममता के आंचल में सारा संसार समा सकता है। प्रस्तुत है मां महत्त्व को उजागर करता यह लेख।

- - डॉ. अनामिका प्रकाश श्रीवास्तव

मां तुझे प्रणाम

इंसान की जिंदगी में बहुत अहमियत रखता है मां और मां का रिश्ता। इंसान की पैदाइश से पहले ही इस रिश्ते के मां-बच्चे के बीच तार जुड़े होते हैं। मां अपने लख्ते जिगर को अपनी कोख में नौ माह तक अपने रक्त से पालती-पोसती है, उसे बड़ा करती है। यही एकमात्र रिश्ता है जिसमें संतान और मां नौ माह तक एक शरीर दो जान बन जाते हैं। मां की अपनी औलाद के प्रति प्रेम, स्नेह, लगाव, जुड़ाव, ममता, त्याग सहित अनेकानेक गुणों और खूबियों के मद्देनजर ही दुनिया के तमाम बड़े और महत्त्वपूर्ण धर्मों ने मां को विशेष दर्जा और ओहदा दिया है। विभिन्न धर्म ग्रंथों में मां की महिमा बताई गई है। दुनियावी रिश्ते में एकमात्र मां ही है जिसका उल्लेख विभिन्न धर्मग्रंथों में अन्य रिश्तों के मुकाबले कहीं अधिक और विस्तारित रूप से किया गया है।

मां के समान अन्य कोई देवता नहीं.....

वैदिक धर्म और भारतीय संस्कृति में नारी का गौरवपूर्ण वर्णन है। सभी शास्त्रों में माता के रूप में नारी को अभिनन्दनीय बताया गया है।

वेद संहिताओं में 'माता निर्माता भवति' कहकर माता को जीवन निर्मात्री की उपाधि दी गई है। वेदों में पांच देवों की पूजा का विधान है, उनमें से चार देवता धरती के और पांचवां देवता देवाधिदेव परमेश्वर है। उन चार देवताओं में प्रथम स्थान माता का है। उपनिषद में लिखा है 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव।'

'कूर्म पुराण' में है, 'नास्ति मातृ समं दैवम' अर्थात् मां के समान अन्य कोई देवता नहीं है। 'ऋग्वेद' में परमेश्वर को माता और पिता कहा गया है- 'त्वं हि नः पिता त्वं माता शत क्रतो बभूविथ।'

माता ही बच्चों में संस्कार डालती है। वही उन्हें सीधी राह दिखाती है। इसलिए माता को बच्चे की प्रथम गुरु कहा गया है। 'मातृमान् पितृमान् आचार्यवान् पुरुषो वेद' अर्थात् प्रथम गुरु माता, दूसरा गुरु पिता और तीसरा गुरु आचार्य है।

अथर्ववेद में जन्मभूमि को भी मां कहा गया है। महाभारत में वेदव्यास ने तो माता को भूमि से भी बड़ा बताया है- 'माता गुरुतरा भूमेः।'

जन्नत मां के कदमों के नीचे है

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यह कहानी Sadhana Path के May 2025 संस्करण से ली गई है।

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