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फलों के कचरे से साफ होगा उद्योगिक गंदा पानी
Modern Kheti - Hindi
|15th April 2025
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने कारखानों, उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने का एक अद्भुत तरीका खोजा है।
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इसके लिए शोधकर्ताओं ने फलों के कचरे का उपयोग किया है। यह समाधान किफायती और स्मार्ट होने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल भी है। प्रोफेसर डॉक्टर गोपाल दास के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने अनानास के ऊपरी हिस्सों और मौसमी के रेशों से बायोचार का विकास किया है। अध्ययन से पता चला है कि यह बायोचार नाइट्रोएरोमैटिक यौगिकों को कुशलतापूर्वक अवशोषित कर सकता है। यह नाइट्रोएरोमैटिक यौगिक हानिकारक रसायनों का एक वर्ग है जो आमतौर पर डाई (कपड़ा रंगने), फार्मास्यूटिकल्स, कीटनाशकों और सौंदर्य प्रसाधन जैसे उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी में पाया जाता है। यह अध्ययन आईआईटी, गुवाहाटी से जुड़े शोधकर्ता प्रोफेसर गोपाल दास, नेहा गौतम और सैंटर फॉर द एनवायरमेंट की वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉक्टर दीपमनी डेका द्वारा किया गया है। गौरतलब है कि नाइट्रोएरोमैटिक यौगिक नामक यह कैमिकल इंसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। इन रसायनों का उपयोग डाई, दवा और कीटनाशकों जैसे कई उद्योगों में किया जाता है, लेकिन जब यह पानी में छोड़े जाते हैं, तो प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा करते हैं। ये आसानी से विघटित नहीं होते और लम्बे समय तक पर्यावरण में बने र
यह कहानी Modern Kheti - Hindi के 15th April 2025 संस्करण से ली गई है।
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