कोशिश गोल्ड - मुक्त

Pratiman - July - September 2015

filled-star
Pratiman

मैगज़्टर गोल्ड के साथ असीमित हो जाओ

पढ़ना Pratiman केवल एक सदस्यता के साथ 10,000+ अन्य पत्रिकाएँ और समाचार पत्र  

कैटलॉग देखें

1 महीना

$14.99

1 वर्ष

$149.99

$12/month

(OR)

केवल Pratiman की सदस्यता लें

यह अंक खरीदें: July - September 2015

July - September 2015 से शुरू होने वाले undefined अंक

July - September 2015 से शुरू होने वाले undefined अंक

यह अंक खरीदें

$4.99

Subscription plans are currently unavailable for this magazine. If you are a Magzter GOLD user, you can read all the back issues with your subscription. If you are not a Magzter GOLD user, you can purchase the back issues and read them.

Please choose your subscription plan

किसी भी समय रद्द करें.

(कोई प्रतिबद्धता नहीं) ⓘ

यदि आप सदस्यता से खुश नहीं हैं, तो आप पूर्ण धनवापसी के लिए सदस्यता आरंभ तिथि से 7 दिनों के भीतर हमें help@magzter.com पर ईमेल कर सकते हैं। कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा - वादा! (नोट: एकल अंक खरीद के लिए लागू नहीं)

डिजिटल सदस्यता

त्वरित पहुँच ⓘ

मैगज़टर वेबसाइट, आईओएस, एंड्रॉइड और अमेज़ॅन ऐप पर तुरंत पढ़ना शुरू करने के लिए अभी सदस्यता लें।

सत्यापित सुरक्षित

भुगतान ⓘ

मैगज़्टर एक सत्यापित स्ट्राइप व्यापारी है।

इस अंक में

Pratiman July - September 2015 issue

Pratiman Description:

पहला दौर मुख्यतः अंग्रेज़ी में और यदा-कदा अन्य भारतीय भाषाओं में लिखी गयी बेहतरीन रचनाओं को अनुवाद और सम्पादन के जरिये हिन्दी में लाने का था। इसमें मिली अपेक्षाकृत सफलता के बाद अंग्रेज़ी से अनुवाद और सम्पादन पर जोर कायम रखते हुए भारतीय भाषाओं में भी समाज-चिन्तन करने की दिशा में बढ़ने की जरूरत महसूस हो रही थी। लेकिन इस पहलकदमी के साथ व्याहारिक और ज्ञानमीमांसक धरातल पर एक रचनात्मक मुठभेड़ की पूर्व-शर्त जुड़ी हुई थी। सीएसडीएस के स्वर्ण जयंती वर्ष में समाज-विज्ञान और मानविकी की अर्धवार्षिकी पूर्व-समीक्षित पत्रिकाप्रतिमान समय समाज संस्कृति का प्रकाशन इस शर्त की आंशिक पूर्ति कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में अध्ययन पीठ में अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी में भी लेखन करने वाले विद्वानों की संख्या बढ़ी है। साथ ही भारतीय भाषा कार्यक्रम के इर्द-गिर्द कुछ युवा और सम्भावनापूर्ण अनुसंधानकर्त्ता भी जमा हुए हैं। प्रतिमान का मक़सद इस जमात की जरूरते पूरी करते हुए हिन्दी की विशाल मुफस्सिल दुनिया में फैले हुए अनगिनत शोधकत्ताओं तक पहुँचना है। समाज-चिन्तन की दुनिया में चलने वाली सैद्धान्तिक बहसों और समसामयिक राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श का केन्द्र बनने के अलावा यह मंच अन्य भारतीय भाषाओं की बौद्धिकता के साथ जुड़ने के हर मौके का लाभ उठाने की फ़िराक़ में भी रहेगा।

हाल के अंक

संबंधित शीर्षक

लोकप्रिय श्रेणियां