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शारीरिक शादी के साथ आत्मिक शादी भी हो
Rishi Prasad Hindi
|February 2026
सत्संग के बिना भक्ति में बरकत नहीं आयेगी और भक्ति के बिना सत्संग का रस नहीं टिकेगा।
-
(पूज्य बापूजी के सत्संग से)
भगवान कहते हैं:
धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ॥
'हे भरतश्रेष्ठ! प्राणियों में जो धर्म से अविरुद्ध काम है वह मैं हूँ।' (गीता : ७.११)
धर्म से अविरुद्ध (शास्त्र के अनुकूल) जो काम है, वह तो मेरा स्वरूप है, उसीसे सृष्टि चलती है। लेकिन मोह से अगर संबंध जोड़ते हैं तो वे पति-पत्नी जरूर एक-दूसरे के लिए शत्रु होते ही हैं। शादी का एक अर्थ होता है खुशी। 'शादी' का मतलब सच्ची खुशी के द्वार खोलने के लिए एक-दूसरे को सहयोग करना। शारीरिक शादियों के साथ-साथ आत्मिक शादी भी होनी चाहिए। हस्तमिलाप हो जाय, पति-पत्नी एक-दूसरे को हार डाल दें... हो गयी शादी? नहीं, उसके साथ-साथ आत्मिक लग्न का विधान है।
Cette histoire est tirée de l'édition February 2026 de Rishi Prasad Hindi.
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