Facebook Pixel शारीरिक शादी के साथ आत्मिक शादी भी हो | Rishi Prasad Hindi - religious-spiritual - Lisez cet article sur Magzter.com
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शारीरिक शादी के साथ आत्मिक शादी भी हो

Rishi Prasad Hindi

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February 2026

सत्संग के बिना भक्ति में बरकत नहीं आयेगी और भक्ति के बिना सत्संग का रस नहीं टिकेगा।

(पूज्य बापूजी के सत्संग से)

भगवान कहते हैं:

धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ॥

'हे भरतश्रेष्ठ! प्राणियों में जो धर्म से अविरुद्ध काम है वह मैं हूँ।' (गीता : ७.११)

धर्म से अविरुद्ध (शास्त्र के अनुकूल) जो काम है, वह तो मेरा स्वरूप है, उसीसे सृष्टि चलती है। लेकिन मोह से अगर संबंध जोड़ते हैं तो वे पति-पत्नी जरूर एक-दूसरे के लिए शत्रु होते ही हैं। शादी का एक अर्थ होता है खुशी। 'शादी' का मतलब सच्ची खुशी के द्वार खोलने के लिए एक-दूसरे को सहयोग करना। शारीरिक शादियों के साथ-साथ आत्मिक शादी भी होनी चाहिए। हस्तमिलाप हो जाय, पति-पत्नी एक-दूसरे को हार डाल दें... हो गयी शादी? नहीं, उसके साथ-साथ आत्मिक लग्न का विधान है।

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