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नमस्कार क्यों ?
Rishi Prasad Hindi
|February 2023
(अंक ३५९ से आगे)
-
नमस्कार अर्थात् क्या?
पूज्य बापूजी के सत्संग-वचनामृत में आता आता है : "अब नमस्कार का अर्थ समझ लो। वैष्णव शास्त्र नमस्कार का अर्थ करता है : न मे इति नमः। 'यह शरीर मैं नहीं हूँ, यह मेरा नहीं है; मन मैं नहीं हूँ, यह मेरा नहीं है और आधिभौतिक चीजें मेरी नहीं हैं... तो मैं क्या हूँ ? मैं सच्चिदानंद का हूँ, सच्चिदानंद मेरे हैं।' इस प्रकार भक्त जो कुछ चीज लेतादेता है उसमें से 'मेरा' पन हटाता जाता है।
देनेवाले राम, लेनेवाले राम... लोग भले यश दे दें कि 'इन्होंने यह किया है, इन्होंने इतना दिया है...' परंतु भक्त समझता है कि 'मैं आया था तो अंग पर कपड़ा भी नहीं था और जाऊँगा तो शरीर भी छोड़कर जाऊँगा, यह तो तेरी रहमत है कि तेरी दी हुई चीज मेरे द्वारा तू काम में लगवा रहा है।' ऐसा अगर विचार करता है तो वह उत्तम दाता है और उत्तम फल को पाता है। इसलिए जो कुछ काम करो, ईश्वर को मन-ही-मन नमस्कार करके करो -
Cette histoire est tirée de l'édition February 2023 de Rishi Prasad Hindi.
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