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विभिन्न भावों में ग्रहों के 12 प्रकार से फल
Jyotish Sagar
|March 2026
पंचम भाव में ग्रहों के 12 प्रकार से फल
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यदि जन्मपत्रिका में पंचम भाव में शुक्र अपनी उच्चराशि मीन में स्थित हो, तो जातक की पुत्री रूपवती एवं सौभाग्यशालिनी होती है।
प्रस्तुत लेखमाला में 'कश्यप जातक' में वर्णित लग्नादि द्वादश भावों में सूर्यादि सप्तग्रहों के उच्चादि राशिगतजन्य बारह प्रकार के फलों का वर्णन किया जा रहा है। इस लेखमाला की पंचम कड़ी में पंचम भाव में सूर्यादि सप्तग्रहों के फलों का वर्णन कर रहे हैं।
पंचम भाव में सूर्य के 12 प्रकार से फल
स्वोच्चे स्वोच्चनवांशे च शुभवर्गेऽथ नीचगे। नीचांशे क्रूरषड्वर्गे मित्रभे सुहृदंशके।। वर्गोत्तमेऽरिभेर्यंशे स्वक्षेद्वादशधाक्रमात्। फलं पञ्चम भावोत्थं कथ्यते यवनोदितम्।। हिंस्राश्चाल्पायुषो दैन्यरोगाद्या जातिनष्टकाः। विकलाङ्गा गर्भनष्टास्तैक्ष्ण-सौभाग्यसंयुताः।। कुशीलवृत्ता व्यसनसंयुता परदारजाः। परस्त्रीजश्च विगुणाश्चौराऽर्कैः पञ्चमे सुताः।।
1. पंचम भाव में उच्च राशिस्थ सूर्य : सूर्य यदि पंचम भाव में उच्च राशि का हो, तो जातक का पुत्र हिंसक स्वभाव वाला होता है। धनु लग्न में पंचम भाव में सूर्य अपनी उच्चराशि मेष में होता है।
2. पंचम भाव में उच्च नवांशस्थ सूर्य : जन्मपत्रिका में पंचम भाव में सूर्य हो और नवांश में वह उच्च नवांशस्थ हो, तो जातक की सन्तति अल्पायु होती है।
3. शुभ ग्रह के वर्ग में सूर्य : जन्मपत्रिका में सूर्य पंचम भाव में स्थित हो और षड्वर्ग में वह शुभ ग्रहों के वर्गों में स्थित हो, तो जातक की सन्तति दीनता, रोगादि से युक्त होती है।
4. पंचम भाव में नीच राशि में सूर्य : मिथुन लग्न की कुण्डली में यदि सूर्य पंचम भाव में अपनी नीचराशि तुला में स्थित हो, तो जातक की सन्तति जाति को नष्ट करने वाली होती है।
5. नीच राशि के नवांश में सूर्य : जन्मपत्रिका में सूर्य पंचम भाव में स्थित हो और नवांश में वह तुला राशि का हो, तो जातक की सन्तति बेचैन अथवा विकलांग हो सकती है।
6. पापग्रह के वर्ग में सूर्य : जन्मपत्रिका में सूर्य पंचम भाव में स्थित हो और षड्वर्ग में वह पापग्रह की राशियों में स्थित हो, तो उसकी यह स्थिति गर्भनाशक होती है।
7.
Cette histoire est tirée de l'édition March 2026 de Jyotish Sagar.
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