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एकादश भाव शुभ अथवा अशुभ
Jyotish Sagar
|February 2026
किसी भी जन्मपत्रिका का ग्यारहवाँ भाव इच्छापूर्ति तथा लाभ के बारे में बताता है।
ग्यारहवाँ भाव दशम भाव का दूसरा भाव है। दशम भाव कर्म भाव कहलाता है, अतः ग्यारहवाँ भाव कर्म का धन है। जातक की मेहनत अथवा कर्म का पारितोषिक कितना होगा? यह इस भाव से पता चलता है, इसलिए यह भाव प्रोफेशन (कामकाज अथवा पेशा) से प्राप्त होने वाला लाभ या जातक की आय को बताता है। इसके साथ ही ग्यारहवाँ भाव जातक की संगति के बारे में भी सूचना देता है। ग्यारहवें भाव के ढेर सारे अच्छे कारकत्व होने के बावजूद पराशर ऋषि ने इस भाव के स्वामी को पापी कहा है। पराशर जी ने तीनों त्रिषडाय भावों अर्थात् तृतीय, षष्ठ और एकादश भाव के स्वामियों को पापी ग्रहों की संज्ञा दी है। हमारे महान् ऋषि-मुनियों ने काम, क्रोध एवं लोभ को नर्क का द्वार कहा है। तीसरा भाव कामनाओं का भाव कहलाता है। षष्ठ भाव क्रोध को बढ़ाने वाला भाव है तथा एकादश भाव लोभ का भाव है।
Cette histoire est tirée de l'édition February 2026 de Jyotish Sagar.
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