Essayer OR - Gratuit
जयप्रकाश से प्रकाशनाथ तक का सफर!
Jyotish Sagar
|April 2025
मीन राशि में केतु जब गुरु से द्रष्ट होता है, तब वह जातक को कष्ट प्रदान करके जीवन से विरक्त करते हुए मोक्ष अथवा संन्यास की ओर मोड़ देता है। ऐसा जातक धर्मात्मा साधु होता है।
पृथ्वीलोक को मृत्युलोक भी कहा गया है। यह कर्मलोक भी है, क्योंकि यहाँ जन्म लेने वाला प्रत्येक जीव-जन्तु कर्म किए बगैर रह ही नहीं सकता। मनुष्य भी कर्म करता है और कर्म चाहे अच्छा हो अथवा बुरा, कर्म तो होगा ही। फिर उस अच्छे या बुरे कर्म का मन्थन होगा और उस मन्थन से कर्मफल प्राप्त होगा, क्योंकि जब हम कर्म किए बगैर रह ही नहीं सके, तो फल भी प्राप्त होने से नहीं रोक सकते और जब कर्मफल प्राप्त होगा, तो उस फल का भोग करने के लिए फिर एक जन्म, एक शीर्षक, एक उपाधि लेनी ही होगी। इसलिए दर्शनशास्त्र बार-बार यही सिखाता है, उपनिषदों में वर्णित कहानियाँ यही बताती हैं कि कर्म का सन्तुलन बनाकर कर्म करें। इन्द्रियों के सुख के लिए कर्म नहीं करें, क्योंकि कर्म हुआ है, तो कर्मफल भी मिलेगा और कर्मफल भी मिलेगा, तो उस फल को भोगना भी स्वयं ही पड़ेगा और जब भोगना पड़ेगा, तो उसके लिए फिर एक भाग्य, एक विधान विधि द्वारा निर्मित किया जाएगा। उसी के अनुरूप जन्म होगा। जब जन्म उसी के अनुरूप होगा, तो उसे भोगना तो होगा ही।
ज्योतिषियों के पास लोग अधिकतर इसलिए जाते हैं कि अशुभ कर्म फल मिल रहा है, तो उसे रोककर शुभ फल प्राप्त किया जा सके, लेकिन क्या कभी सोचा है कि जो मिल रहा है, वह फल तो हमारा ही है। हमने इसे प्राप्त किया है। हमने ऐसे कर्म किए, तब जाकर यह कर्मफल सिद्ध हुआ है, लेकिन यदि अशुभ अथवा संघर्षयुक्त कर्मफल मिला, तो हम उसे बदलने के लिए दौड़ पड़ते हैं, मन्दिरों में जाते हैं, ज्योतिषियों के पास जाते हैं, तान्त्रिकों के पास जाते हैं, लेकिन दर्शनशास्त्र और वेदों के चक्षु कहे जाने वाले ज्योतिषशास्त्र में भी मनुष्य को कर्मफल भोगने के लिए प्रेरित किया गया है। यानी जो जान लिया गया है कि हमारा ही कर्मफल है, उसे स्वीकार करते हुए मन में आत्मविश्वास जगा, उस ईश्वर की शरण का स्मरण करते हुए कर्म फल भोगा जाए। ये भी मान लिया जाए कि जब कर्म किया, तो किसने किया था और जब कर्मफल मिल रहा है, तो किसके कर्मों का फल है?
Cette histoire est tirée de l'édition April 2025 de Jyotish Sagar.
Abonnez-vous à Magzter GOLD pour accéder à des milliers d'histoires premium sélectionnées et à plus de 9 000 magazines et journaux.
Déjà abonné ? Se connecter
PLUS D'HISTOIRES DE Jyotish Sagar
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Listen
Translate
Change font size

