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युद्ध का खमियाजा भुगतती हैं औरतें
Sarita
|July Second 2025
पुरुषों ने जबजब जमीन पर अपने वर्चस्व को ले कर युद्ध लड़े, उन में हारे हुए पुरुष के राज्य की स्त्रियां सब से ज्यादा कुचली और सताई गईं.
युद्ध केवल राष्ट्रों की सीमाओं को बढ़ाने के लिए सैनिकों के बीच होने वाला संघर्ष नहीं होता, बल्कि वह समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है, खासकर औरतों को.
धरती पर मानव सभ्यताओं के विकास के साथ ही मानव समूहों में जमीन पर वर्चस्व को ले कर युद्ध हो रहे हैं. पहले युद्ध विभिन्न कबीलों के बीच होते थे, जब देश बने तो ये देशों के बीच होने लगे. कहने को मनुष्य ने जंगल और जंगली जानवरों के बीच से निकल कर सभ्यताएं बसाईं मगर सच्चाई यह है कि वह सभ्य होने के बजाय अधिक से अधिक जानवर बनता गया, सभ्यता का लबादा ओढ़े खूंखार जानवर.
सभ्यता, संस्कार और संस्कृति के नाम पर उस ने धर्म नामक चीज का आविष्कार किया. धर्म चूंकि पुरुष द्वारा ईजाद की गई चीज थी लिहाजा उस ने खुद को सर्वोच्च रखते हुए अनेक नियमों से युक्त ग्रंथों की रचना की. इन ग्रंथों में स्त्री को दोयम दर्जे पर रख कर पुरुष ने उसे अपनी सेविका बनाए रखने की साजिश रची.
किसी भी धर्म की धार्मिक पुस्तक पढ़ कर देखें, औरत सदैव सेविका के समान पुरुष के आश्रय में प्रताड़ित और इस्तेमाल की जाने वाली वस्तु के रूप में ही वर्णित है. कहीं वह उस के चरणों में बैठी उस के पैर दबा रही है तो कहीं वह उस के श्राप से प्रताड़ित आंसू बहाती नजर आती है. कहीं वह नाजायज बच्चा पैदा कर के समाज के डर से अपनी ममता का गला घोंटने और अपने बच्चे को पानी में प्रवाहित करने के लिए मजबूर है, कहीं वह अपने चरित्र की परीक्षा देती धरती में समाती दिख रही है तो कहीं भरी सभा में उस के जिस्म से कपड़े नोचे जा रहे हैं.
धार्मिक किताबों में कहीं भी औरत को राजकाज संभालते या निर्देश देते नहीं दिखाया गया है. यानी, लीडर के रूप में उस की कल्पना कभी नहीं की गई. यानी, पुरुष हमेशा औरत पर हावी रहा और पुरुषों के बीच जबजब युद्ध हुए, उन्होंने दूसरे पक्ष की औरतों पर जुल्म करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा.
पुरुषों ने जबजब जमीन पर अपने वर्चस्व को ले कर युद्ध लड़े उस में हारे हुए पुरुष के राज्य की औरतें सब से ज्यादा कुचली और सताई गईं. दरअसल युद्ध केवल राष्ट्रों की सीमाओं को बढ़ाने के लिए सैनिकों के बीच होने वाला संघर्ष नहीं होता, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है, विशेष रूप से महिलाओं को.
Cette histoire est tirée de l'édition July Second 2025 de Sarita.
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