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संकटों का समंदर

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June 25, 2025

समुद्र में दो बड़े जहाजों के हादसे के साथ ही केरल को एक गहराते हुए समुद्री आपातकाल का सामना करना पड़ा. इससे पसरने वाला रसायन नाजुक समुद्री पारिस्थितिकी और लाखों लोगों की आजीविका के लिए खतरा बना

- जीमॉन जैकब

संकटों का समंदर

महज दो हफ्ते के भीतर केरल के 600 किलोमीटर लंबे तटीय इलाके - जहां हरे-भरे बैकवाटर और मछुआरों की बस्तियां आबाद हैं-को दो बड़े समुद्री हादसों ने झकझोर कर रख दिया. इन घटनाओं से तटीय समुदायों में दहशत फैल गई और पर्यावरण को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई.

पहला हादसा 25 मई को हुआ, जब लाइबेरियन झंडे वाले जहाज एमएससी एलसा 3- जिस पर 643 कंटेनर लदे हुए थे - संभावित तकनीकी खराबी की वजह से थोट्टापल्ली तट से 14.6 समुद्री मील दूर पानी में समा गया. यह जहाज विझिंजम से कोच्चि के बीच सफर कर रहा था. इसके 24 क्रू मेंबरों को वक्त रहते बचा लिया गया, मगर असली मुसीबत समुंदर के नीचे छिपी थी: खतरनाक रसायनों से भरे कई कंटेनर पानी में डूबे हुए हैं या तट पर बहकर आ रहे हैं-खासकर तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और आलप्पुझा में. बचाव टीमें अभी भी ईंधन टैंक से तेल रिसाव को रोकने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं. लेकिन एक और बड़ा खतरा है—'प्लास्टिक नर्डल्स', यानी प्लास्टिक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले छोटे-छोटे कण, जो मछलियों की प्रजनन ऋतु में समुद्र में फैल गए हैं.

एमवी वान हाइ

503 झंडा सिंगापुर मार्ग कोलंबो से मुंबई हादसा अझिक्कल (कन्नूर) तट के पास विस्फोट और आग तारीख 9 जून माल 650 कंटेनर जिनमें ज्वलनशील / विषैले पदार्थ जैसे नाइट्रोसेल्यूलोज, अल्कोहल, लिथियम बैटरियां; साथ ही 2,000 समुद्री तेल और -240 टन डीजल

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