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पहले कश्मीर, फिर अयोध्या अब यूसीसी जो कहा, कर दिखाया
DASTAKTIMES
|February 2024
15 अगस्त 1947 का दिन, जब भारत ब्रिटिश गुलामी से पूर्णतः स्वतंत्र हुआ। परंतु किसे पता था कि स्वतंत्रता मिलने के कुछ ही समय बाद भारतीयों की जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा। देश के सामने दो ज्वलंत मुद्दे पैदा हुए, जिनके स्थायी समाधान की मांग उठी। एक था - जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370, जो देश की अखंडता व संवैधानिक एकरूपता को चनौती मिलना। दसरा था अयोध्या, जहां रामलला को उनके जन्म स्थान से दूर करना।
अयोध्या का मसला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा था तो अनुच्छेद-370 को राष्ट्रवाद के खिलाफ माना जाता रहा। परंतु दुर्भाग्य से केंद्र व राज्य की सत्ता में ऐसी राष्ट्रवादी सरकारें नहीं थी, जो दोनों ही मुद्दों को सुलझातीं। नतीजा, सत्ताधारी पार्टियां समुदाय विशेष के वोट बैंक की चाह में इन संवेदनशील मुद्दों को नजरंदाज करती रही। न सरकारी स्तर पर गंभीर प्रयास हुए और न न्यायालय में मजबूत पैरवी। उलटा, हिंदू संगठनों के आंदोलनों को भी कुचलने के कुत्सित प्रयास हुए। 1990 के दशक के बाद कई बार उम्मीदें जगीं, मगर धूमिल भी होती रहीं।
मगर, आज 7 दशक के लंबे इंतजार के बाद असंभव लगने वाली ये दो समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो गई हैं। यह संभव किया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। पहले 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया और अब अयोध्या में राम लला को उनके जन्म स्थान पर स्थापित किया। पूरा देश भक्ति व उल्लास के रंग में सराबौर नजर आ रहा है। वहीं, 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या व अनुच्छेद-370 मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में बताया था और आज पीएम मोदी ने इन्हें पूरा भी कर दिया है। पीएम मोदी ने सिद्ध किया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और जनता का असीम प्रेम हो तो बड़े से बड़ा कार्य संभव है।
'आसमान में सिर उठाकर,
घने बादलों को चीरकर,
रोशनी का संकल्प लें,
अभी तो सूरज उगा है...।'

Cette histoire est tirée de l'édition February 2024 de DASTAKTIMES.
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