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अपनी तरह का पहला सैन्य विद्रोह था पेशावर कांड

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January 2024

उत्तराखंड के जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आने के बाद मामला रुक गया, लेकिन परिजन अब उक्त जमीन को अपने नाम पर कराने या उत्तराखंड में जमीन दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग जायज इसलिये है कि देशप्रेम की मिसाल पेश करने और अदम्य साहस दिखाने पर अंग्रेज सरकार ने चन्द्रसिंह की जमीन जायदाद जब्त कर ली थी।

- जयसिंह रावत

अपनी तरह का पहला सैन्य विद्रोह था पेशावर कांड

विश्व में शायद ही कोई ऐसा सैन्य विद्रोह हुआ हो जिसमें विद्रोही सैनिकों द्वारा हथियार उठाने के बजाय हथियार गिरा दिये हों। ऐसी मिसाल गढ़वाली सैनिकों ने पेशावर में 23 अप्रैल 1930 को पेश की थी। यही नहीं, इस काण्ड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली के नेतृत्व में इन कट्टर हिन्दू विद्रोही सैनिकों ने निहत्थे पठानों पर गोलियां बरसाने के बजाय गोरों के सैनिकों के आगे अपने सीने तान लिये थे। विडम्बना देखिये कि बहादुरी के साथ ही राष्ट्र प्रेम और साम्प्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल पेश करने वाले वे सभी गढ़वाली सैनिक गुमनामी में खो गये। जबकि राजनीतिक नेताओं की यादों को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए सारे ही देश में नामकरणों की होड़ लगी हुयी है। विद्रोह के नायक चन्द्रसिंह 'गढ़वाली' को चुनावी मजबूरी के चलते यदाकदा याद तो किया जाता है, लेकिन उनके वंशजों को ऐसी दो गज जमीन आज नसीब नहीं हो पायी जिसे वे अपना कह सकें और सिर ढकने के लिए एक स्थाई आशियाना बना सकें। विद्रोह के कारण 'गढ़वाली' की जमीन जायदाद जब्त हो गयी थी। चन्द्रसिंह के उन 32 गुमनाम देशभक्त सैनिकों का तो भारत ही नहीं बल्कि उत्तराखण्ड में भी कोई नामलेवा नहीं है। 

देश प्रेम, सौहार्द और बलिदान की मिसाल पेश की विद्रोही सैनिकों ने : 1 अक्टूबर को पेशावर काण्ड के हीरो चन्द्रसिंह 'गढ़वाली' की पुण्यतिथि है। इसी दिन 1979 को दिल्ली के एक अस्पताल में वीर चन्द्रसिंह 'गढ़वाली' का निधन हो गया था। इस अवसर पर चन्द्रसिंह 'गढ़वाली' को तो याद किया ही जाना चाहिये लेकिन उनके साथ ही 2/18 रॉयल गढ़वाल रायफल्स के उन बहादुर सैनिकों को भी अवश्य ही नमन किया जाना चाहिये, जिन्होंने अपने जीवन और नौकरी की परवाह न कर चन्द्रसिंह के आदेश पर 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे स्वाधीनता प्रेमी पठानों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। इस घटना ने सारे देश में स्वाधीनता आन्दोलन में एक नया उन्माद पैदा किया।

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