Essayer OR - Gratuit
महक ने दी यादों को दस्तक
Aha Zindagi
|July 2025
आप कहीं जा रहे होते हैं, व्यस्त दिनचर्या में खोए हुए, तभी अचानक कोई महक आती है और आप वहीं थम जाते हैं।
वो महक कभी उस आंगन में ले जाती है जहां दादी आम के पापड़ सुखा रही थीं तो कभी गांव के हलवाई की दुकान में। कोई भी गंध अचानक बिसरे अतीत की एक झलक दिखा देती है जैसे किसी ने रील घुमा दी हो।
एक दिन मेरी स्कूटी ने चलने से इंकार कर दिया। खीझ तो हुई, लेकिन उस दिन बस पकड़नी पड़ी। लोकल बसों की बात ही कुछ और होती है— हर चेहरा, हर कोना कोई कहानी कहता है। बड़ी मुश्किल से मुझे खिड़की के पास एक सीट मिली। मेरे बग़ल में एक औरत अपने छोटे-से बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। जैसे ही बस चली, मैं बाहर झांकने लगी। पर तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे दिन को पूरी तरह बदल दिया। एक जानी-पहचानी-सी महक मेरी नाक से टकराई। वो इतनी तीव्र और आत्मीय थी कि एक पल के लिए मेरी सांसें थम गई।
मैंने आंखें बंद कीं और उस महक को पहचाना-वो गोभी के पराठे की महक थी। और वो सिर्फ़ पराठा नहीं था, उसमें मेरी मां के हाथों के पराठों की ख़ुशबू थी। मैंने चौंककर देखा-मेरे पास बैठी औरत अपने बच्चे को वही पराठा खिला रही थी। उस पल मैं उस बस में नहीं थी। मैं उस घर में थी जहां मां सुबह-सुबह गोभी कीसकर आटा गूंधती थीं। जिस सधे हुए अंदाज़ में वो बेलन चलाती थीं, वो रसोई में लगने वाली हल्की-सी हींग और घी की महक, वो कुरकुरे पराठे जो सीधे तवे से मेरी प्लेट में आते थे— सभी कुछ एकदम ताज़ा हो उठा। उस पूरी बस यात्रा में, मैं आंखें बंद किए बैठी रही और उस सुगंध के ज़रिए अपने पूरे बचपन को एक बार फिर जीती रही।
नई नौकरी, नया शहर, नया रास्ता
Cette histoire est tirée de l'édition July 2025 de Aha Zindagi.
Abonnez-vous à Magzter GOLD pour accéder à des milliers d'histoires premium sélectionnées et à plus de 9 000 magazines et journaux.
Déjà abonné ? Se connecter
PLUS D'HISTOIRES DE Aha Zindagi
Aha Zindagi
पंचम सुर में राग बसंत
बसंत पंचमी... एक ऐसा त्योहार जो हर साल लौटकर बस मौसम नहीं बदलता, दिल के भीतर दबे बचपन को भी जगा देता है।
6 mins
January 2026
Aha Zindagi
मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय
एनसीईआरटी की कक्षा नवीं की पुस्तक में संकलित यह रचना बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए अवश्य पठनीय श्रेणी की है।
8 mins
January 2026
Aha Zindagi
जब अच्छा बन जाए बुरा...
साफ़-सफ़ाई, व्यवस्था और सतर्कता अच्छी आदतें हैं, पर क्या हो जब ये अनियंत्रित हो जाएं और जीवन ही मुश्किल बना दें? ऐसी स्थिति ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहलाती है।
6 mins
January 2026
Aha Zindagi
सीखना कभी न छोड़ें...
हमारे जीवन में अनेक अध्याय होते हैं, जो किसी स्थान से आरंभ होकर किसी बिंदु पर समाप्त हो जाते हैं। किंतु इसी मध्य एक ऐसी प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जो कभी रुकती नहीं और वह है निरंतर सीखते रहने की प्रक्रिया।
2 mins
January 2026
Aha Zindagi
कूद जाओ
यदि आप 900 लोगों के बीच बोल चुके हैं तो 1000 लोगों के बीच भी आप अपना भाषण दे सकते हैं, इसलिए एक काग़ज़ लीजिए और अपने इन डरों को उस पर उतार लीजिए जिन पर आप काबू पाना चाहते हैं।
4 mins
January 2026
Aha Zindagi
अभी मज़ा चखाता हूं!
आख़िर लोग तुरत-फुरत आहत क्यों हो जाते हैं, क्यों हर असहमति को इज़्ज़त का सवाल बना लेते हैं, और कैसे इतिहास, परवरिश और व्यवस्था मिलकर हमारे भीतर यह 'सबक़ सिखाने' वाली कुसंस्कृति पैदा करते हैं? यह मंथन ज़रूरी है।
6 mins
January 2026
Aha Zindagi
अतिथि देवो भव...
बचपन से सुना, दोहराया, लेकिन शायद कभी ठहरकर ये नहीं सोचा कि सही मायने में अतिथि का सम्मान करना किसे कहते हैं... इसमें एक नागरिक की भूमिका कहां और कैसे आती है?
4 mins
January 2026
Aha Zindagi
जब शब्द से ज़्यादा दर्द दे चुप्पी
दांपत्य में साइलेंट ट्रीटमेंट यानी जानबूझकर बात न करना, सामने वाले को उसकी ग़लती का एहसास कराने या उसे सबक़ सिखाने का तरीक़ा समझा जाता है।
7 mins
January 2026
Aha Zindagi
अलार्म और सपनों के बीच की जंग
हर दिन की शुरुआत किसी घोषणा से नहीं, एक समझौते से होती है। सपनों की मुलायम दुनिया और ज़िम्मेदारियों की कठोर हक़ीक़त के बीच हर सुबह एक अलार्म बजता है। उस अलार्म के बाद के पांच मिनट में नींद विदा लेती है और जीवन अपनी शर्तों के साथ दस्तक देता है।
3 mins
January 2026
Aha Zindagi
हर दिन कल्याण हो
2026 कल्याणकारी वर्ष तब बनेगा जब हम हर दिन भारतीय परंपरा-प्रणीत स्वास्थ्य पथ पर चलेंगे।
4 mins
January 2026
Listen
Translate
Change font size
