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हम नित्य नवीन हों
Sadhana Path
|January 2025
जीवन में नवीनता का अर्थ क्या है नित्य नवीनता, नित्यनूतन सकारात्मकता। उस परमात्मा के उद्देश्य को पूर्ण करना जिसने बड़े प्रेम से सृष्टि और मनुष्य की रचना की है, इस शरीर में सब कुछ होते हुए भी प्राण निकलने पर इस शरीर में दुर्गंध आने लगती है। अगर हम एक पेंटिंग बनाते हैं तो हम कितने खुश होते हैं यदि कोई पेंटिंग खराब कर दे तो हमें कितना बुरा लगता है। हम सब ईश्वर की बनाई हुई एक सुन्दर कृति हैं हम जब बुरे कर्म करते हैं तो उस परमेश्वर को कितना दुख होता होगा, नवीन हम तभी बनेंगे जब हम नकारात्मक विचार त्यागेंगे और जीवन के सकारात्मक उद्देश्य को आत्मसात करेंगे। महात्मागांधी ने कहा है -
'जीवन समस्त कलाओं से श्रेष्ठ है मैं तो जानता हूं जो अच्छी तरह जीना जानता है वही सबसे सच्चा कलाकार है।'
हमारे ऋग्वेद में कहा गया है -
'कद्व ऋतं कट्टतक्व प्रत्ना'
'क्या उचित है क्या अनुचित यह निरंतर विचारों।'
मनुष्य किसी भी वस्तु को लेकर अहंकार करता है यही उसकी सबसे बड़ी अज्ञानता है, सत्कर्म ही नवीन और सार्वभौमिक है। सिकन्दर महान के जीवन की घटना है -
Cette histoire est tirée de l'édition January 2025 de Sadhana Path.
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