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महाकुम्भ की महायात्रा

Sadhana Path

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January 2025

ऐसी मान्यता है कि कुम्भ में स्नान करने के बाद आपके समस्त दुःख दूर हो जाते हैं, यहां तक कि जन्म-मृत्यु के फेर से आप बच जाते हैं। आईए जानते हैं कि आखिर 2025 में लगने वाला महाकुंभ क्यों इतना खास है।

- मोनिका अग्रवाल

महाकुम्भ की महायात्रा

कुंभ मेला भारतीयों की आस्था से जुड़ा एक पर्व है। इस पर्व में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग शामिल होने आते हैं। महाकुंभ हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है। ये प्रयागराज में लगता है। कुंभ मेले का हिंदू धर्म में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। 30-45 दिनों तक चलने वाला ये मेला भारत के लिए काफी मायने रखता है। पूरे 12 सालों के बाद एक बार फिर ये मेला प्रयागराज में साल 2025 में लगने जा रहा है। इस मेले से कई तरह की मान्यताएं जुड़ी हैं। मान्यता है कि कुंभ मेले में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। आइए आज आपको बताते हैं कुंभ मेले का महत्व और इससे जुड़े जरूरी तथ्य। आखिर किन लोगों के लिए महाकुंभ सबसे उत्तम समय है?

कितने प्रकार के होते हैं कुंभ

कुंभ मेला मुख्य तौर पर चार तरह का होता है। किसी भी कुंभ मेले का आयोजन ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

कुंभ: यह सबसे सामान्य प्रकार का कुंभ है जो हर 12 साल में एक बार चार पवित्र नदियों-गंगा, यमुना, गोदावरी और कावेरी के संगम पर आयोजित किया जाता है।

अर्धकुंभ: यह कुंभ हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है और यह कुंभ और महाकुंभ के बीच का एक मध्यवर्ती आयोजन होता है।

पूर्णकुंभ: यह कुंभ हर 144 साल में एक बार आयोजित होता है और इसे सबसे पवित्र माना जाता है।

महाकुंभ: यह कुंभ भी हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है लेकिन यह कुंभ विशेष रूप से प्रयागराज में गंगा और यमुना के संगम पर होता है।

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