Facebook Pixel मुझे त्योहार पर गुजिया बनाना पसंद है -प्रियदर्शिनी इंदलकर | Saras Salil - Hindi - entertainment - Lisez cet article sur Magzter.com
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मुझे त्योहार पर गुजिया बनाना पसंद है -प्रियदर्शिनी इंदलकर

Saras Salil - Hindi

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October Second 2022

मराठी भाषा की हीरोइन प्रियदर्शिनी इंदलकर कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई आई और कई मराठी नाटकों में काम करती रहीं. वहीं से उन्हें मराठी कौमेडी शो 'हास्य जत्रा' में काम करने का मौका मिला.

- सोमा घोष

मुझे त्योहार पर गुजिया बनाना पसंद है -प्रियदर्शिनी इंदलकर

प्रियदर्शिनी इंदलकर को बचपन से ऐक्टिंग का शौक था. उन्होंने स्कूलकालेज में रहते हुए कई नाटकों और डांस शो में भाग लिया, जिन्हें लोग पसंद किया करते थे. इस के अलावा वे एक जानीमानी डबिंग आर्टिस्ट भी हैं. बचपन में वे कार्टून शो देख कर उसे मराठी में ट्रांसलेट कर के गाती थीं.

बड़ी हो कर प्रियदर्शिनी इंदलकर को पता चला कि डबिंग भी एक प्रोफैशन है और इस से भी पैसा कमाया जा सकता है. लिहाजा, मुंबई आ कर उन्होंने मराठी नाटकों में भाग लेने के साथसाथ डबिंग भी की, जिस से उन्हें कुछ पैसे मिलने लगे थे. फिलहाल, प्रियदर्शिनी इंदलकर 'हास्य जत्रा' में अलगअलग स्क्रिप्ट्स के मुताबिक किरदार निभाती हैं, जो दर्शकों को बहुत पसंद हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

आप को इस फील्ड में आने की प्रेरणा कैसे और कहां से मिली? 

मेरे परिवार से कोई भी इस फील्ड से नहीं है, लेकिन मेरे पिताजी संभाजी इंदलकर को किस्से सुनाने और उन्हें मजाकिया ढंग से पेश करने में बहुत मजा आता है, जो वे ज्यादातर ग्रुप में करते हैं. उन्हीं से मुझे प्रेरणा मिली.

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भोजपुरी सिनेमा में यह बात जगजाहिर है कि हीरोइनों का कैरियर केवल भोजपुरी ऐक्टरों के बलबूते ही चलता रहा है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में भोजपुरी के टौप ऐक्टरों के हिसाब से ही फिल्मों में हीरोइनों को कास्ट किया जाता है.

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गुंजन जोशी तो 'फाड़' निकले

\"दिल्ली के नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ऐक्टिंग की ट्रेनिंग ले कर आया तो था ऐक्टर बनने, पर बन गया फिल्म स्टोरी राइटर. इस फील्ड में भी मुझे दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का प्यार मिला, क्योंकि मेरा शौक एक आर्टिस्ट बनना ही था, जिस में राइटिंग, डायरैक्शन, ऐक्टिंग सब शामिल रहा है. मेरे आदर्श गुरुदत्त हैं, क्योंकि उन्होंने लेखन से ले कर अभिनय तक सब किया और दोनों में कामयाब रहे,\" यह कहना है गुंजन जोशी का.

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सैक्स से जुड़े रोग आदमी और औरत दोनों में सैक्स के प्रति अरुचि बढ़ाते हैं. इस के साथ ही ये शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की परेशानियों को भी बढ़ाते हैं.

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एक थप्पड़ की कीमत

वैसे तो रवि अपने एकलौते बेटे सोहम को प्यार करता था, पर जबतब उसे थप्पड़ भी मार देता था. एक दिन उस ने फिर वही सब दोहराया, लेकिन यह थप्पड़ उस पर ही भारी पड़ गया. लेकिन कैसे?

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वर्मा साहब की रिटायरमैंट गाजेबाजे के साथ हुई. घर पर दावत भी दी गई, पर उस के बाद उन की पत्नी ने ऐसा बम फोड़ा कि वर्मा साहब के कानों तले की जमीन खिसक गई...

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सदियों से मर्दऔरतों में नाजायज संबंध बनते आए हैं. अब तो इस तरह के एप आ गए हैं, जहां औनलाइन डेटिंग की जा सकती है. इसे एक सुरक्षित तरीका बताया जाता है. क्या वाकई में ऐसा है?

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कत्ल करने से पीछे नहीं हट रही पत्नियां

एक पारिवारिक झगड़े के मसले पर फैसला देते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की है कि \"बीते डेढ़ दशक में प्रेम प्रसंगों के चलते होने वाली हत्याओं की दर बढ़ी है, जिस से समाज पर बुरा असर पड़ा है. इस पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है.'

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