Facebook Pixel हर हृदय में ईश्वर हैं फिर भी दीनता-दरिद्रता क्यों? | Rishi Prasad Hindi - Religious-Spiritual - Lisez cet article sur Magzter.com

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हर हृदय में ईश्वर हैं फिर भी दीनता-दरिद्रता क्यों?

Rishi Prasad Hindi

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November 2021

भगवान के भजन से भगवान के ऐश्वर्य के साथ आपका चित्त एकाकार होता है।

हर हृदय में ईश्वर हैं फिर भी दीनता-दरिद्रता क्यों?

सारे शास्त्रों की घोषणा है कि ईश्वर सर्वव्यापक है, सर्वत्र विद्यमान है। यह सत्य है पर इससे व्यक्ति के अंतःकरण की समस्याओं का समाधान नहीं होता है। संत तुलसीदासजी कहते हैं:

अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी ।

सकल जीव जग दीन दुखारी ||

(श्री रामचरित. बा.कां. : २२.४)

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सांस्कृतिक सम्पत्ति-विनाशक विकास-कार्यों से सांस्कृतिक सम्पत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए : यूनेस्को

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